प्रमोद कुमार, कैमूर। बिहार में लगातार हो रही भारी बारिश और पड़ोसी राज्य/ देश (झारखंड व नेपाल) के पहाड़ी इलाकों से आ रहे पानी के कारण कोसी, गंडक, सोन, गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं। कई जगहों पर ये नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। राजधानी पटना समेत, कैमूर, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास समेत कई 13 जिले बाढ़ की चेपट में है, जिससे नीचले इलाकों में तेजी से बाढ़ का पानी फैल रहा है। वहीं, नदी के किनारे बसे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।
पटना में गंगा-पुनपुन का रौद्र रूप
राजधानी पटना में गंगा का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। बता दें कि गांधी घाट, दीघा घाट और मनेर में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं, पटना सिटी के भद्रघाट और महावीर घाट की सर्विस लेन पर घुटनों तक पानी पहुंच गया है। पुनपुन नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिसके चलते नीचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूब गई। वहीं, तेज बहाव के चलते कई सड़क बह गए। बख्तियारपुर में बाढ़ का पानी फैलने से स्कूल तक को बंद करना पड़ा है।
कैमूर में उफान पर कर्मनाशा नदी

कैमूर में उत्तर प्रदेश बिहार को जोड़ने वाली कर्मनाशा नदी इस समय उफान पर चल रही है। दुर्गावती थाना क्षेत्र अंतर्गत आदर्श नुआव के समीप दुर्गावती ककरैत मार्ग पर बने छलका पर करीब चार फीट पानी की तेज धारा बह रहा है। तेज धारा के बहाव में राहगीर अपने जान को जोखिम में डालकर सड़क को पार कर रहे हैं। लोग अपने जिंदगी की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसकी सूचना मिलते ही मसौढ़ा पंचायत के मुखिया संजय सिंह और बब्बू उक्त स्थल पर पहुंचकर लोगों से अपील कर रहे हैं कि आप सभी लोग पानी की तेज धारा में पैदल या गाड़ी लेकर पार ना करें।
मूसाखाड़ बांध से छोड़ा गया 35 हजार क्यूसेक पानी
मुखिया संजय सिंह ने इस संबंध में अनुमंडल एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी से बात कर उक्त जगह पर बैरिकेडिंग करने की अपील की है। जानकारी के अनुसार मूसाखाड़ बांध से करीब 30 से 35 हजार क्यूसेक कि उसे पानी छोड़ा गया है, जो लतीफ साहब बियर को ओवरफ्लो करते हुए वह पानी कर्मनाशा नदी में डिस्चार्ज हो रहा है, जिसके कारण कर्मनाशा नदी उफनाई हुई है।
समस्तीपुर और भागलपुर में भी बिगड़े हालात
समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर पहुंच गया है। भागलपुर में राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर कटाव लगातार बढ़ रहा है। इससे रेलवे के टैगिंग बांध पर भी खतरा पैदा हो गया है। बांध को बचाने के लिए प्रशासन की ओर से बड़े पैमाने पर बचाव कार्य चलाया जा रहा है। करीब 200 ट्रैक्टर और तीन स्टीमर की मदद से लगातार बालू की बोरियां डाली जा रही हैं।
सोन और दरधा नदी भी उफनाई
इधर, रोहतास में सोन नदी का पानी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। नौहट्टा में सोन के टीलों पर खेती करने वाले करीब 100 लोग पानी के बीच फंस गए हैं। सासाराम के कादिरगंज इलाके में भी जलजमाव से स्थिति खराब है। यहां करीब 50 घरों में रहने वाले 300 लोग पिछले चार दिनों से पानी की समस्या झेल रहे हैं। वहीं जहानाबाद में दरधा नदी उफान पर है और जाफरगंज पुल के ऊपर से करीब दो फीट पानी बह रहा है।
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