Business Desk – Foreign Portfolio Investors : करीब चार महीने तक लगातार बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों (Foreign Portfolio Investors-FPI) ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार की ओर रुख किया है। जुलाई 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय Stock Market में करीब 20,200 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश (Net Investment) किया है। इससे लगातार चार महीने से जारी बिकवाली का सिलसिला थम गया है और बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयरों के आकर्षक Valuation, कंपनियों के बेहतर Corporate Earnings, आईटी सेक्टर के मजबूत नतीजे और वैश्विक स्तर पर कम हुए दबाव की वजह से विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी हुई है।

चार महीने की लगातार बिकवाली के बाद बदला रुख

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार के लिए बड़ा बदलाव मानी जा रही है। इससे पहले लगातार चार महीनों तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाली थी।

मार्च में विदेशी निवेशकों ने करीब 1.17 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपए, मई में 32,963 करोड़ रुपए और जून में 49,340 करोड़ रुपए भारतीय शेयर बाजार से निकाले थे।

2026 में अब भी 2.54 लाख करोड़ रुपए की निकासी

हालांकि जुलाई में हुई खरीदारी से बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन पूरे साल का आंकड़ा अभी भी विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली की तस्वीर दिखाता है।

साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार से कुल 2.54 लाख करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। यह रकम पूरे साल 2025 के दौरान हुई 1.66 लाख करोड़ रुपए की कुल निकासी से भी ज्यादा है। यानी जुलाई की खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों का कुल निवेश अभी भी निगेटिव बना हुआ है।

भारत में क्यों लौट रहे हैं विदेशी निवेशक?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, बड़े शेयरों (Large Cap Stocks) में आकर्षक वैल्युएशन और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ाया है।

इसके अलावा दुनिया के कई बाजारों की तुलना में भारत अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। यही वजह है कि विदेशी फंड एक बार फिर भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं।

साउथ कोरिया और ताइवान की अनिश्चितता का मिला फायदा

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार के मुताबिक, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता और सेमीकंडक्टर यानी Chip Trade में ज्यादा जोखिम के कारण विदेशी निवेशकों ने भारत जैसे स्थिर बाजारों की ओर रुख किया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय रुपए की मजबूती और लार्ज-कैप शेयरों में उचित वैल्युएशन भी विदेशी निवेशकों की वापसी की बड़ी वजह है।

IT सेक्टर के अच्छे नतीजों ने बढ़ाया भरोसा

इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trak के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते के अनुसार, जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजों ने कई सेक्टरों में सुधार के संकेत दिए हैं।

खासतौर पर IT Sector में उम्मीद से बेहतर नतीजे आने से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। बेहतर तिमाही नतीजों के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से आईटी उद्योग की ग्रोथ पर बनी कई चिंताएं भी कम हुई हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉलर पर दबाव कम होना और अमेरिका में ब्याज दरों के चरम (Peak Interest Rate) के करीब पहुंचने की उम्मीद भी भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

डेट मार्केट में भी विदेशी निवेश बढ़ा

विदेशी निवेशकों ने सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय Debt Market में भी मजबूत निवेश किया है। जुलाई में General Route के जरिए विदेशी निवेशकों ने भारतीय डेट सिक्योरिटीज में 29,212 करोड़ रुपए लगाए। वहीं Fully Accessible Route (FAR) के जरिए 3,033 करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश किया गया। इस तरह जुलाई में डेट मार्केट में कुल 32,245 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश दर्ज किया गया।

आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की यह खरीदारी आगे भी जारी रहेगी या नहीं, यह कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगा। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पवित्र मुखर्जी के मुताबिक, निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक माहौल पर रहेगी।

घरेलू स्तर पर कंपनियों के Q1FY27 Results और 5 अगस्त को आने वाले Reserve Bank of India (RBI) Monetary Policy के फैसले पर भी बाजार की नजर रहेगी। यही फैसले आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों के रुख और शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

FPI क्या होता है?

Foreign Portfolio Investment (FPI) वह निवेश होता है, जिसमें विदेशी निवेशक, संस्थाएं या विदेशी फंड किसी दूसरे देश के शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर या अन्य वित्तीय साधनों में पैसा लगाते हैं। इन निवेशकों का उद्देश्य कंपनी का संचालन करना नहीं, बल्कि निवेश से रिटर्न कमाना होता है।

डेट मार्केट क्या है?

Debt Market वह वित्तीय बाजार है, जहां सरकार और कंपनियां बॉन्ड, डिबेंचर और अन्य फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज जारी करती हैं। निवेशक इनमें पैसा लगाकर तय ब्याज दर के अनुसार रिटर्न प्राप्त करते हैं। सामान्य तौर पर डेट मार्केट को शेयर बाजार की तुलना में कम जोखिम वाला निवेश विकल्प माना जाता है।