तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने वोटर लिस्ट के SIR प्रोसेस पर सवाल उठाए हैं. पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने रविवार को कहा कि पंजाब में चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. जबकि उन्होंने तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है.
वोटर ID और आधार जमा करने के बाद उनसे नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज मांगा गया. इस मामले पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की है.
पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात तथा मिस्र में भारत के उच्चायुक्त/राजदूत के रूप में अपनी सेवा देने के बाद अपनी नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज मांगने पर वोटर लिस्ट में सुधार से जुड़ी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
उन्होंने X पर अपने अनुभव को साझा करते हुए निर्वाचन आयोग की इस व्यवस्था पर पारदर्शिता और साफ जानकारी की कमी का आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि उनसे यह साबित करने के लिए कुछ खास दस्तावेज मांगे गए कि वह भारतीय नागरिक हैं.
पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने बताया कि उनसे दोबारा ऐसे डॉक्यूमेंट्स लाने को कहा गया जिनसे पता चले कि वह भारतीय नागरिक हैं. वह भी तब जब उन्होंने अपना वोटर ID कार्ड और आधार कार्ड पहले ही जमा कर दिया था.
नवदीप सूरी ने आगे कहा कि तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद अगर मुझे अपनी नागरिकता साबित करने में परेशानी हो रही है, तो आम नागरिक का क्या होगा?
SIR की शुरुआत जून 2025 में बिहार से हुई थी. इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से 60 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए थे. इनमें मृत मतदाताओं के नाम भी शामिल थे. इसके बाद पश्चिम बंगाल में भी SIR की प्रक्रिया हुई.
भारत के चुनाव आयोग, राज्य सरकार या केंद्र ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर अनिंदिता मित्रा ने कहा कि पंजाब के सभी 117 विधानसभा सीटों के लिए ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल, 2026, पिछले हफ्ते स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 के तहत पब्लिश किया गया था.
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