Former Justice Yashwant Verma Cash Case: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के पूर्व जज यशवंत वर्मा कैशकांड केस में जांच कमेटी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दिया है। जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार (12 अगस्त) को संसद में पेश किया। रिपोर्ट में यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत सभी आरोप सही साबित हुए हैं। इसके आधार पर कानून के अनुसार आगे की जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल मार्च 2025 में उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद स्टोररूम से भारी मात्रा में जला हुआ नोट और नकदी मिलने का आरोप लगा था। जांच में उनका स्टोररूम पर नियंत्रण होना पाया गया। इसके बाद जुलाई 2025 में 200 से ज्यादा सांसदों ने उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर दस्तखत किए थे। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने बाद में इस्तीफा दे दिया था।
इंक्वायरी कमेटी की रिपोर्ट में पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगाए गए तीनों आरोप सिद्ध हो गए हैं। जांच समिति ने जज के खिलाफ लगाए गए आर्टिकल्स ऑफ चार्ज- I, II और III (Articles of Charge I, II और III) तीनों आरोपों को सिद्ध पाया है। च कमेटी ने उन पर लगे जिन तीन आरोपों को सिद्ध किया। उनमें पहला- अघोषित नकदी, दूसरा- साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही और तीसरा- टालमटोल और असंतोषजनक जवाब का आरोप शामिल है।
जानें क्या है पूरा विवाद
बता दें कि यह पूरा विवाद 14 मार्च 2025 की रात शुरू हुआ था। दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को स्टोररूम में जली हुई भारी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि कानून मंत्रालय ने अब तक उनका इस्तीफा अधिसूचित नहीं किया है। विवाद के बाद उन्हें वापस उनके मूल हाईकोर्ट यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था।जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने जज को हटाने के प्रस्ताव पर दस्तखत किए थे। इसके बाद पिछले साल अगस्त में बिरला ने तीन सदस्यीय जज जांच समिति बनाई थी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की बनाई अंदरूनी समिति ने अपनी जांच में पाया था कि जिस स्टोररूम में नकदी छिपी मिली, उस पर जस्टिस वर्मा का सीधा या परोक्ष नियंत्रण था।
समिति के अनुसार, जज नकदी की मौजूदगी, स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। इसलिए समिति ने इस आरोप को सिद्ध माना। समिति ने पाया कि मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित और संरक्षित नहीं रखा गया। कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए जाने की बात सामने आई।
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