राजकुमार दुबे, भानुप्रतापपुर। भानुप्रतापपुर में इंसानियत की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। जिन हाथों में कभी हथियार थे, आज उन्हीं हाथों ने एक घायल मजदूर की जान बचाने के लिए मदद का हाथ बढ़ाया।

ट्रक से बचने के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, भानुप्रतापपुर के पास मुल्ला स्थित पुनर्वास केंद्र में निर्माण कार्य कर रहा एक मजदूर अपने साथी के साथ दोपहर का भोजन कर वापस कैंप लौट रहा था। इसी दौरान कैंप के सामने एक ट्रक से बचने के प्रयास में उनकी बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। गनीमत रही कि वे ट्रक की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।

हादसे के तुरंत बाद पुनर्वास केंद्र में रह रहे आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली बिना देर किए घायल मजदूर की मदद के लिए दौड़ पड़े। उन्होंने घायल को सुरक्षित उठाकर कैंप के अंदर पहुंचाया, जहां कंपनी नंबर-5 में डॉक्टर रह चुके कुंवर सिंह और पद्मा ने उसका प्राथमिक उपचार किया और उसकी देखभाल की।

कभी जंगलों में करता था नक्सलियों का इलाज

बता दें कि मुख्यधारा में लौटा पूर्व नक्सली कुंवर सिंह कंपनी नंबर-5 में डॉक्टर के रूप में काम करता था और मुठभेड़ों में गंभीर रूप से घायल नक्सलियों का इलाज करता था। उसने बताया कि कई बार उसने जंगलों में ऑपरेशन कर नक्सलियों के शरीर में लगी गोलियां भी निकाली थीं।

कुंवर सिंह ने बताया कि मैंने बड़े नक्सली नेताओं, जैसे सेंट्रल कमेटी सदस्य संग्राम, सुजाता और मनोज का भी इलाज किया है। मुठभेड़ों के बाद दर्जनों नक्सलियों के शरीर से गोलियां निकालकर उनकी जान बचाई है। यह दृश्य केवल एक सड़क दुर्घटना का नहीं, बल्कि बदलते जीवन और नई सोच का प्रतीक था। जिन लोगों ने कभी जंगलों में संघर्ष और हिंसा का रास्ता अपनाया था, आज वही लोग एक घायल की जान बचाने के लिए सबसे पहले आगे आए।

यह घटना बताती है कि पुनर्वास केवल जीवन बदलने का नाम नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भी परिचायक है। इंसानियत, करुणा और सेवा का यह भाव हर उस सोच को सकारात्मक संदेश देता है, जो बदलाव की शक्ति पर विश्वास करती है।

भानुप्रतापपुर में सामने आई यह तस्वीर साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी रही हों, इंसान के भीतर की मानवता कभी समाप्त नहीं होती। जरूरत केवल उसे अवसर और सही दिशा देने की होती है।

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