हाल ही में FSSAI द्वारा जारी आदेशों की वजह से बड़ी-बड़ी कंपनियों की नींद उड़ा दी। बीते दिनों FSSAI ने डाबर के 100% शुद्धता के दावे वाले प्रोडक्ट्स को बैन कर दिया था। आनन फानन में कंपनी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसके बाद उसे अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक FSSAI के इस आदेश पर रोक लगा दी। वहीँ अब FSSAI ने बड़ी-बड़ी शराब कंपनियों की नींद उड़ा दी है।
दरअसल, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से कुछ तरह की शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर शराब कंपनियों और नियामक के बीच विवाद बढ़ गया है। United Spirits, Mohan Meakin समेत कई बड़ी शराब कंपनियों ने FSSAI के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले में सोमवार को अहम सुनवाई होगी, जिसमें यह तय होना है कि कंपनियां संबंधित शराब की बोतलों की बिक्री दोबारा कर पाएंगी या नहीं।
क्या है पूरा विवाद?
FSSAI की आपत्ति मुख्य रूप से शराब की लेबलिंग, फ्लेवर और उम्र से जुड़े दावों को लेकर है। नियामक का आरोप है कि कुछ IMFL कंपनियां रम और व्हिस्की जैसे उत्पादों में अतिरिक्त या कृत्रिम फ्लेवर मिलाने के बावजूद उन्हें सीधे ‘रम’ या ‘व्हिस्की’ के नाम से बेच रही हैं।
FSSAI के मुताबिक, अगर किसी स्पिरिट में अलग से फ्लेवर मिलाया गया है तो उसके लेबल पर स्पष्ट रूप से ‘रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट’ जैसे शब्द होने चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की सही जानकारी मिल सके।
उम्र और ‘कैस्क एज्ड’ दावे पर भी सवाल
विवाद का एक अहम मुद्दा शराब की उम्र से जुड़ा है। कुछ बोतलों पर शराब को ‘कैस्क में पुरानी और परिपक्व’ बताया गया है। FSSAI का कहना है कि ब्लेंड में इस्तेमाल होने वाली सबसे कम उम्र की स्पिरिट को ध्यान में रखकर ही उम्र संबंधी दावा किया जाना चाहिए।
कंपनियों ने जताया भारी नुकसान का डर
United Spirits की ओर से पेश वरिष्ठ वकील बीरेंद्र सराफ ने कहा कि FSSAI के अचानक लिए गए फैसले से पूरे शराब उद्योग को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। कंपनियों का तर्क है कि वे दशकों से निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत इन उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। कंपनियों ने यह भी कहा कि लेबल तुरंत बदलना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए राज्य आबकारी विभाग से आवश्यक मंजूरी लेनी पड़ती है।
कोर्ट ने कहा- रातोंरात इंडस्ट्री बंद नहीं हो सकती
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूरे उद्योग को अचानक बंद करने से गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शराब के निर्माण, जांच और मार्केटिंग के तकनीकी मानक तय करना न्यायपालिका का काम नहीं है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह को FSSAI से पूरी जानकारी लेकर अगली सुनवाई में जवाब देने को कहा है। अब सोमवार की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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