Rohini Acharya: भारत की जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। दरअसल भारत सरकार का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही है। सरकार के इस दावे भारत सरकार के पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाया हैं। उनका कहना है कि भारत की GDP ग्रोथ वास्तव में 2.6% ही है। वहीं, अब इस मुद्दे पर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा है।
सच बोलने की हिम्मत जुटाइए- रोहिणी
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट करते हुए लिखा, प्रधानमंत्री जी… सच बोलने की हिम्मत जुटाइए और देश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर देश के सामने रखिए। रोहिणी ने कहा कि, प्रधानमंत्री का एक और झूठ पकड़ा गया, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ व् देश के भूतपूर्व वित्त-सचिव श्री सुभाष चंद्र गर्ग ने पीएम मोदी के द्वारा जीडीपी के ग्रोथ के संदर्भ में किए गए दावे को तथ्यों के साथ झूठा साबित कर दिया है।
‘पीएम का झूठ बोलना, गंभीर चिंता का विषय’
रोहिणी ने कहा कि, देश की अर्थव्यवस्था जैसे बेहद अहम मुद्दे पर भी देश के प्रधानमंत्री के द्वारा झूठ बोला जाना गंभीर चिंता का विषय है। वैसे भी अब ये पूरी दुनिया को पता है कि प्रधानमंत्री मोदी झूठ बोलने की अपनी आदत से लाचार हैं और इसी वजह से प्रधानमंत्री के द्वारा कही गई किसी भी बात पर, अंधभक्तों और प्रधानमंत्री की नियंत्रण वाली मीडिया को छोड़कर, कोई सहज विश्वास नहीं करता। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री अपनी विश्वसनीयता इस कदर खो चुके हैं कि अब उनके द्वारा कही गई हर बात की माकूल पड़ताल होती है और लगभग हर दफा प्रधानमंत्री झूठे साबित होते हैं।
इस दौरान रोहिणी आचार्य ने पीएम मोदी से कुछ सवाल भी पूछे:-
- प्रधानमंत्री जी .. अब आपके द्वारा प्रस्तुत झूठे आंकड़ों की चमक बिल्कुल फीकी पड़ चुकी है और अब देश आपसे झूठे विकास के दावे नहीं, अर्थव्यवस्था की वास्तविक रफ्तार के संदर्भ में सच्चा जवाब चाहता है।
- प्रधानमंत्री जी .. तथ्यों के साथ देश आपसे जानना चाहता है और देश को ये जानने का पूरा हक़ है कि ” कागज पर 7.8% का विकास और जमीन पर 2.6% आखिर असली तस्वीर क्या है?
- प्रधानमंत्री जी .. आखिर आप ये कब समझेंगे कि “आंकड़ों की बाजीगरी से अर्थव्यवस्था नहीं बदलती; देश को वास्तविक विकास चाहिए?
- प्रधानमंत्री जी .. आखिर आप कब तक इस सच को झुठलाते रहेंगे कि ” विकास के दावों और आर्थिक हकीकत के बीच बढ़ता फासला आपके शासनकाल की सबसे बड़ी विफलता है?
- प्रधानमंत्री जी .. “आपके प्रचार की व्यवस्था अलग है और देश की अर्थव्यवस्था अलग ” आपको ये फर्क समझना होगा।
- प्रधानमंत्री जी .. देश को सुर्खियों वाला विकास नहीं, जेब और रोजगार में दिखने वाला विकास चाहिए। सवाल सिर्फ विकास दर का नहीं, उन आंकड़ों की विश्वसनीयता का है जिनके सहारे आप अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं।
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