Lalluram Desk. भारत में सदियों से पूजा-पाठ और धार्मिक आस्था को जीवन का अहम हिस्सा माना जाता रहा है, लेकिन अब विज्ञान भी इसकी ताकत को स्वीकार करने लगा है। एक महत्वपूर्ण शोध में यह सामने आया है कि जो महिलाएं नियमित रूप से या खासकर सप्ताह में एक बार पूजा या आराधना करती हैं ।उनमें लंबी उम्र जीने की संभावना अन्य महिलाओं के मुकाबले अधिक होती है।

यह अध्ययन करीब 75,000 महिलाओं पर आधारित है। जिसमें 20 वर्षों तक उनके जीवनशैली और स्वास्थ्य पर नजर रखी गई। क्योंकि शोध बहुत पुराना है, लेकिन इसके मायने आज के परिवेश में इतने ही सटीक है। शोध के अनुसार, जो महिलाएं सप्ताह में एक बार मंदिर, मस्जिद, चर्च या किसी भी धार्मिक स्थल पर जाती हैं, या घर पर श्रद्धा से पूजा करती है, उनमें मृत्यु का खतरा लगभग 25 से 26 प्रतिशत तक कम पाया गया। वहीं जो महिलाएं कभी पूजा नहीं करतीं, उनमें दिल की बीमारी और कैंसर से मौत का खतरा अधिक देखा गया।

भारतीय परंपरा में भी पूजा-पाठ को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर से जुड़ाव का माध्यम बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भक्ति करने से मन के विकार दूर होते हैं और व्यक्ति के भीतर धैर्य, संतुलन और आशा का संचार होता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने से महिलाओं को सामाजिक सहयोग मिलता है, तनाव और अवसाद कम होते हैं, और वे नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहती हैं। यही कारण है कि उनके जीवन में संतुलन और सकारात्मकता बनी रहती है, जो उनकी सेहत और आयु दोनों पर सकारात्मक असर भी डालती है।

इस तरह आस्था और विज्ञान दोनों यह संकेत दे रहे हैं कि नियमित पूजा-पाठ केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि यह एक स्वस्थ और लंबी जिंदगी की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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