E-20 पेट्रोल को लेकर देशभर में उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल में E-22 से E-30 तक उच्च एथेनॉल ब्लेंडिंग लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल धीमी कर दी है। हालांकि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इन मिश्रणों के मानक तय कर चुका है, लेकिन सरकार अब किसी जल्दबाजी के बजाय तकनीकी अध्ययन और व्यापक जन-परामर्श के बाद ही आगे बढ़ेगी।

E-20 पर विवाद के बाद बदला सरकार का रुख

E-20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों ने माइलेज में कमी, इंजन और पुराने वाहनों पर संभावित असर जैसी चिंताएं जताई हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियों की ओर से सफाई दिए जाने के बावजूद बहस जारी है। इसी वजह से उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर नीति निर्माण की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है।

ARAI करेगी व्यापक अध्ययन

सरकार ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) को E-22 से E-30 तक के ईंधनों का मौजूदा वाहनों पर प्रभाव जांचने की जिम्मेदारी सौंपी है। अध्ययन में माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता, रखरखाव लागत और वाहन प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। रिपोर्ट अगले वर्ष के अंत तक आने की संभावना है।

चार अहम पहलुओं पर होगा फैसला

  • कीमत और टैक्स राहत: उत्पाद शुल्क में छूट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने और ईंधन को सस्ता बनाने की संभावना पर विचार।
  • वाहन अनुकूलता: E-22 या उससे अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए इंजन, फ्यूल सिस्टम और सॉफ्टवेयर अपग्रेड की आवश्यकता का आकलन।
  • माइलेज की चिंता: कम माइलेज की शिकायतों के समाधान के लिए तकनीकी विकल्पों का परीक्षण।
  • कृषि और जैव-ऊर्जा: अधिक एथेनॉल की मांग से चीनी मिलों की अतिरिक्त क्षमता का उपयोग और किसानों की आय बढ़ने की संभावनाओं का मूल्यांकन।

क्या है E-22 से E-30 पेट्रोल?

E-22, E-25, E-27 और E-30 ऐसे ईंधन हैं जिनमें सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक एथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार का मानना है कि इन ईंधनों को लागू करने से पहले तकनीकी, आर्थिक और उपभोक्ता हितों से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा जरूरी है। इसलिए अंतिम फैसला अध्ययन रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के बाद ही लिया जाएगा।

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