सत्या राजपूत, रायपुर। धूल, धुआं और काला धब्बा, यही वो हकीकत है जो पिछले दो साल से रायपुर के धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के मढ़ी गांव और आसपास के एक दर्जन गांवों की जिंदगी को तबाह कर रही है। गौरी गणेश आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड का कारखाना दिन-रात जहरीला धुआं और डस्ट उगल रहा है, हवा, पानी और मिट्टी तीनों प्रदूषित हो गया है। ग्रामीण कह रहे हैं ये फैक्ट्री नहीं, बीमारी की फैक्ट्री है, विकास नहीं विनाश लेन वाले फैक्ट्री है।

गांव का हाल- काला सब कुछ
मढ़ी, जंजगीरा, नकटी, खपरी समेत आसपास के गांवों में जाकर देखिए तो नजारा डरावना है। तालाबों का पानी काला पड़ गया है, धान के खेत काले हो रहे हैं, पेड़ों के पत्ते जहरीले हो गए हैं, मवेशी बीमार पड़ रहे हैं और मर रहे हैं। किसान बताते हैं कि मंडी में उनका काला धान को कोई खरीदने को तैयार नहीं है। कई किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

ग्रामीणों की शिकायत है कि आंखों में जलन, कान में संक्रमण, सांस की बीमारियां और पूरे शरीर पर खुजली के दाग आम हो गए हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों की हालत ज्यादा खराब है। एक स्थानीय महिला ने बताया सुबह उठते ही धूल का गुबार घर में घुस जाता है। कपड़े, बर्तन, खाना सब पर काला परत जम जाता है।
स्कूल पर संकट, सड़कें तबाह
कंपनी का मुख्य द्वार स्कूल और आवासीय इलाके के ठीक बगल में है। शासकीय हाईस्कूल के बच्चे धूल, धुएं और भारी वाहनों के शोर के कारण पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। 40 टन वजन वाले मालवाहक वाहन दिन-रात दौड़ रहे हैं। सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनी सड़क भी इन ट्रकों के कारण बर्बाद हो गई है। कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।

खतरे में भविष्य
गौरी गणेश आयरन स्पात का कहर देश के भविष्य पर बरप रहा है। हालत इतनी बिगड़ गई है कि नन्हे-मुन्ने बच्चे जब अपने क्षेत्र से बाहर जाते हैं या स्कूल जाते हैं, तो लोग इन बच्चों से दूर भागते हैं और उनके पास जाने से बचते हैं। इसका कारण यह है कि इन बच्चों के शरीर में खुजली की समस्या है तथा शरीर पर दाग-धब्बे हैं, जो प्रदूषण से हुआ है।

मवेशियों का आहार बना स्लो पॉइजन
हाथ में लाठी और सिर पर गमछा बांधे चिंतित अवस्था में बैठे ग्रामीण के पास जब लल्लूराम डॉट कॉम की टीम पहुंची और उनसे पूछा, “क्या सोच रहे हो दादा?” तो उनकी आंखें भर आईं। भारी आवाज में उन्होंने कहा कि “आज मैंने अपनी बची हुई बकरी बेच दी है। अब सोच रहा हूं कि आगे क्या करूंगा। पहले बकरी-बकरा पालकर ही अपने परिवार का जीवन-यापन करता था।”

फिर टीम ने पूछा, “आपने बकरियां क्यों बेच दीं?” इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि यहां का घास, पेड़-पौधों की पत्तियां और पैरा भी जहरीला हो गया है। इसे खाने से मवेशी बीमार पड़ जाते हैं और उनकी मौत हो जाती है।
जनप्रतिनिधियों पर बिकने का आरोप
ग्रामीण खुलकर कह रहे हैं कि कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि, विधायक, सरपंच और पंच कंपनी के पक्ष में हैं। यही वजह है कि शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। रात में कंपनी की फैक्ट्री जब भारी धुआं छोड़ती है, तो पूरा इलाका धुएं के अंधेरे में गुम हो जाता है। मजदूरों के साथ भी श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन हो रहा है। न सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे हैं, न उचित वेतन और न ही आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं।

शिकायतें ढेर, कार्रवाई शून्य
क्षेत्र की जनपद सदस्य संध्या दीपक धुरंधर ने हाल ही में सुशासन तिहार में उद्योग-पर्यावरण विभाग को लिखित शिकायत की गई है। सोनतरा की सरपंच सुनंदा समीर वर्मा ने मुख्यमंत्री जनदर्शन में शिकायत की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ धरना-प्रदर्शन करेंगे।
कई बार हो चुका है विरोध प्रदर्शन
दो साल पहले जब कंपनी की पहली जनसुनवाई हुई थी, तब ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध किया था। बावजूद इसके कंपनी को NOC दे दिया गया। अब 18 जून को कंपनी के विस्तार के लिए नई जनसुनवाई होनी है। गांव में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। लोग कह रहे हैं विकास के नाम पर विनाश नहीं सहेंगे।
सच बोलने पर जेल
गांव में प्रदूषण में कि जीना मुहाल कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ गौरी गणेश फैक्ट्री प्रबंधन कहर इतना है की ग्रामीण सच बोलने से डरते हैं। जब लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने ग्रामीणों से सवाल किया उनका कहना है आपका सवालों का जवाब तो दे देंगे लेकिन जवाब देना हमें भारी पड़ता है किसी किसी बहाने जेल भेज दिया जाता है। आज गांव में हमारी की स्थिति बनी है इसके लिए सिर्फ़ कंपनी प्रबंधन ज़िम्मेदार नहीं है। इसके लिए हमारे नेता और हमारे पूर्वज भी ज़िम्मेदार है, जिन्होंने NOC दिया है।
पिक्चर के हीरो, क्षेत्र का विलन
ग्रामीणों से सवाल किया गया कि जहां मवेशी तक ज़िंदा नहीं बच पा रहे हैं, वहां इतनी गंभीर समस्याओं के बीच आप लोग रह रहे हैं, तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत क्यों नहीं करते? इस पर पीड़ित ग्रामीणों ने कहा कि सभी बिक चुके हैं। हमारे विधायक अनुज शर्मा फिल्म के हीरो हैं, लेकिन क्षेत्र के सबसे बड़े विलेन हैं, जो आज तक हमारे गांव नहीं आए। गरीबों के नाम पर जनप्रतिनिधि अपनी गरीबी मिटा रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग
कंपनी पर तुरंत रोक लगाई जाए।
मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
प्रभावित किसानों और परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
मढ़ी और आसपास के गांव अब प्रदूषण और संघर्ष का गढ़ बन गए हैं। सवाल यह है कि प्रशासन कब तक कंपनियों का पक्ष लेता रहेगा और कब लोगों की आवाज सुनेगा? क्या 18 जून की जनसुनवाई में ग्रामीणों की बात मानी जाएगी, या फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी?
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