Lifestyle Desk – आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह आंख खुलते ही मोबाइल चेक करना और रात को सोने से पहले घंटों स्क्रीन पर समय बिताना आम आदत बन गई है. ऑफिस के काम, ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया और मनोरंजन के लिए बढ़ते स्क्रीन टाइम का असर अब हमारी आंखों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है. लगातार मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन देखने की वजह से ड्राई आई सिंड्रोम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

ड्राई आई सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आंखों में पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बन पाते या फिर आंसू जल्दी सूख जाते हैं. इससे आंखों में सूखापन, जलन, खुजली, लालिमा और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. पहले यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ती उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.

ऐसा क्यों होता है?

जब हम मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन को लगातार देखते हैं, तो हमारी पलक झपकाने की दर सामान्य से काफी कम हो जाती है. आमतौर पर व्यक्ति एक मिनट में 15 से 20 बार पलक झपकाता है, लेकिन स्क्रीन देखते समय यह संख्या घटकर 5 से 7 बार तक रह जाती है. इसकी वजह से आंखों की सतह पर मौजूद नमी तेजी से कम होने लगती है और ड्राई आई की समस्या पैदा होती है.

बच्चों में बढ़ रही ये समस्या

बच्चों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. कई घरों में बच्चे मोबाइल देखते हुए खाना खाते हैं या घंटों वीडियो और गेम्स में व्यस्त रहते हैं. स्क्रीन के सामने बैठकर खाना खाने से न केवल आंखों पर असर पड़ता है, बल्कि पाचन तंत्र भी प्रभावित हो सकता है. इससे बच्चों की खाने की आदतें बिगड़ती हैं और उनके शारीरिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

क्या हैं इसके लक्षण

ड्राई आई सिंड्रोम के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आंखों में चुभन, बार-बार पानी आना, आंखों का भारी महसूस होना, रोशनी से परेशानी होना और लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद सिरदर्द होना इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं. यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, तो नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.

इस तरह से पा सकते हैं राहत

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. विशेषज्ञ 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं. इसके तहत हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना चाहिए. इसके अलावा स्क्रीन की ब्राइटनेस को संतुलित रखना, पर्याप्त पानी पीना, नियमित रूप से पलकें झपकाना और सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद करना भी फायदेमंद माना जाता है.

डिजिटल उपकरणों का उपयोग आज की जरूरत है, लेकिन उनका अत्यधिक इस्तेमाल आंखों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है. ऐसे में समय रहते स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना और आंखों की देखभाल पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में गंभीर समस्याओं से बचा जा सके.