प्रदीप मालवीय, उज्जैन। पवित्र श्रावण-भादौ मास में बाबा महाकाल की भव्य सवारी को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगमता को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इस बार सुरक्षा व्यवस्था और सुचारु दर्शन के लिए मंदिर परिसर में मोबाइल के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा, ताकि श्रद्धालु फोटो-वीडियो बनाने में समय खराब न करें और सभी को कम समय में बाबा के सुन्दर और सुलभ दर्शन हो सकें।
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर की श्रावण मास में निकलने वाली सवारियों को लेकर उज्जैन जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी करीब पौने दो करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद किया गया है। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए नगर निगम, पुलिस और विद्युत मंडल समेत सभी विभागों को दो-तीन दिनों के भीतर सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
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दर्शन मार्ग पर मोबाइल बैन
इस बार सबसे बड़ा फैसला मोबाइल को लेकर हुआ है। अक्सर देखा जाता है कि दर्शन के दौरान श्रद्धालु मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाने लगते हैं, जिससे पीछे चल रहे लोगों को परेशानी होती है और सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। इसीलिए इस बार दर्शन मार्ग पर मोबाइल का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने अपील की है कि सभी श्रद्धालु इस व्यवस्था में सहयोग करें। पूरे सवारी मार्ग पर सीसीटीवी, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और 15 चिन्हित स्थानों पर मेडिकल टीमों की तैनाती रहेगी ताकि बाबा के दर्शन हर श्रद्धालु के लिए सुखद और यादगार बन सकें।
- बाबा महाकाल की प्रथम सवारी 03 अगस्त 2026 को और अंतिम राजसी सवारी 07 सितंबर 2026 को निकाली जाएगी।
- 30 जुलाई से 07 सितंबर तक प्रतिदिन मंदिर के पट सुबह 3:00 बजे और प्रत्येक सोमवार को तड़के 2:30 बजे खुलेंगे।
- आम श्रद्धालुओं के लिए त्रिवेणी संग्रहालय (त्रिवेणी गेट) से प्रवेश रहेगा, जबकि शीघ्र दर्शन के लिए गेट नंबर 1 और 5 तय किए गए हैं।
- कावड़ यात्री केवल मंगलवार से शुक्रवार तक ही जल अर्पित कर सकेंगे। अत्यधिक भीड़ के कारण शनिवार, रविवार और सोमवार को अनुमति नहीं होगी।
- इस बार सवारी में मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय कलाकार प्रस्तुतियां देंगे और हर सवारी की एक विशेष थीम होगी। श्रद्धालुओं के लिए मार्ग में 5 एलईडी रथ भी चलेंगे।

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