Dharm Desk – आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो गई है. इस वर्ष गुप्त नवरात्रि 22 जुलाई को समाप्त होगी. वर्ष में कुल चार नवरात्रि मनाई जाती हैं. जिनमें आषाढ़ और माघ माह की गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधना और आराधना के लिए जानी जाती हैं. इन दिनों देवी के नौ स्वरूपों की विधि पूर्वक पूजा की जाती है. हालांकि गुप्त नवरात्रि विशेष साधकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन आम श्रद्धालु भी अपने घर में माता की पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ और मंत्र जाप कर सकते हैं. इस दौरान माता को लाल चुनरी, सिंदूर और गुड़हल के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है.

माता के स्टैंडर में लाल रंग का विशेष महत्व

नवरात्रि के दौरान माता के श्रृंगार में लाल रंग का विशेष महत्व होता है. माता की चुनरी, सिन्दूर, चूड़ियां, कपड़े और यहां तक कि फूल भी लाल रंग के ही अर्पित किए जाते है. धार्मिक दृष्टि से लाल रंग को शक्ति, साहस और वियज का प्रतीक भी है. देवी दुर्गा स्वयं शक्ति का स्वरूप हैं. इसलिए उन्हें लाल रंग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. जो भक्त सच्चे मन से माता को लाल चुनरी, सिन्दूर और अन्य लाल वस्तुएं अर्पित करते हैं, उनकी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती है.

लाल रंग का महत्व पौराणिक कथा से जुड़ा

धार्मिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि, जब पृथ्वी पर राक्षसों का अत्याचार चारों तरफ फैल गया. तब मां दुर्गा ने उन राक्षसों का संहार किया. इस भीषण युद्ध के बाद माता का शरीर राक्षसों के रक्त से लाल हो गया था. यह दृश्य बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बना. इस विजय से माता अत्यंत प्रसन्न हुईं. तभी से लाल रंग उन्हें अत्यंत प्रिय माना जाने लगा. यही कारण है कि भक्त आज भी मां को लाल रंग की वस्तुएं अर्पित करते हैं.

माता को गुड़हल का फूल है विशेष प्रिय

मां दुर्गा को लाल रंग के फूलों में विशेष रूप से गुड़हल अत्यंत प्रिय होता है. देवी पूजन में गुहड़ल का फूल अर्पित करना शुभ है. माना जाता है कि लाल फूलों से माता का श्रृंगार करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है.