हरियाणा के हांसी में एक निजी स्कूल पर एडमिशन के दौरान ड्रेस और स्टेशनरी खरीदने का दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दी है।
नवीन शर्मा, हांसी। एक निजी स्कूल पर बच्चों को स्कूल से ही स्टेशनरी और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप लगा है। छात्रा के पिता प्रीतम अग्रवाल ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत स्थानीय एसडीएम (SDM) को दी है, जिसके बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है। हांसी के एडीएम (ADM) राजेश खोथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि एनसीईआरटी (NCERT) की गाइडलाइन के अनुसार कोई भी छात्र अपनी किताबें और स्टेशनरी अपनी मर्जी से कहीं से भी खरीद सकता है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया है, जो नियमों के तहत मामले की जांच कर रही है।
11वीं में दाखिले और स्टेशनरी पर बढ़ा विवाद
छात्रा के पिता प्रीतम अग्रवाल का कहना है कि उनकी बेटी ने 10वीं कक्षा में 76 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उनका आरोप है कि स्कूल प्रशासन अब 11वीं कक्षा में दाखिला देने के लिए स्कूल से ही ड्रेस और महंगी स्टेशनरी खरीदने का लगातार दबाव बना रहा है। छात्रा के पिता ने बताया कि उन्होंने इस मनमानी के खिलाफ पहले शिक्षा विभाग को शिकायत दी थी, लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री तक अपनी शिकायत भेजी है। पीड़ित छात्रा का भी यही आरोप है कि उसे जानबूझकर परेशान किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार उसे स्कूल में दाखिला मिलना चाहिए।
प्रिंसिपल ने आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार
दूसरी ओर, स्कूल की प्रिंसिपल ऋतु कुमारी ने छात्रा के परिवार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और गलत बताया है। उन्होंने इसे स्कूल की छवि को समाज में बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। प्रिंसिपल का आरोप है कि छात्रा स्कूल के नियमों का पालन नहीं करती थी और कई बार तय स्कूल ड्रेस पहनकर भी नहीं आती थी। उनका कहना है कि परिवार लगातार स्कूल प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। छात्रा के पिता द्वारा पहले भी बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाकर थाने में शिकायत दी गई थी, जिससे स्कूल को लगातार परेशान किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें
प्रिंसिपल ऋतु कुमारी ने साफ किया कि इसी विवादित माहौल के कारण वे छात्रा को दोबारा एडमिशन नहीं दे रहे हैं ताकि स्कूल का अनुशासन खराब न हो। स्कूल प्रशासन ने यह भी सवाल उठाया कि यदि उन्हें स्कूल की नीतियां गलत लगती हैं, तो वे उसी स्कूल में दोबारा दाखिला क्यों करवाना चाहते हैं। स्कूल प्रबंधन के अनुसार उन्होंने किसी को भी विशेष दुकान या स्कूल से सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया है। हांसी के एडीएम राजेश खोथ ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में स्कूल की गलती पाई गई, तो सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। अब करीब एक सप्ताह के भीतर आने वाली शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर ही सबकी नजरें टिकी हैं।

