अखिलेश बिल्लौरे, हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले से प्रशासनिक व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली दुखद खबर सामने आई है। यहां जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में न्याय मांगने पहुंचे एक 55 वर्षीय किसान ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया, जिसकी इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई। इस खौफनाक कदम के पीछे जमीन का पुराना विवाद और प्रशासनिक अनदेखी को मुख्य वजह बताया जा रहा है।

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जनसुनवाई परिसर में अचानक बेहोश हुआ किसान, अस्पताल में तोड़ा दम

पूरा मामला मंगलवार को हरदा जिला पंचायत परिसर का है, जहां जिला स्तरीय जनसुनवाई चल रही थी। हंडिया तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम अजनास रैय्यत के निवासी भगत विश्वकर्मा भी अधिकारियों के सामने अपनी गुहार लगाने पहुंचे थे।

परिसर में मौजूद लोगों के अनुसार, आवेदन देने के दौरान किसान अचानक तड़पने लगा और बेहोश होकर गिर पड़ा। आनन-फानन में उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

मरने से पहले कैमरे पर बोला किसान- ‘मैंने सल्फास खा लिया है’

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने और व्यथित करने वाली बात यह रही कि बेहोश होने और दम तोड़ने से ठीक पहले पीड़ित किसान भगत विश्वकर्मा ने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों के सामने खुद सल्फास खाने की बात स्वीकार की थी। किसान का यह आखिरी बयान अब इस पूरी घटना का सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत बन गया है।

बेटे का रो-रोकर बुरा हाल, लगाए गंभीर आरोप

किसान के पुत्र राकेश विश्वकर्मा ने प्रशासन और व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राकेश का कहना है कि उनका परिवार लंबे समय से एक गंभीर जमीन विवाद से जूझ रहा था। इस समस्या को लेकर उनके पिता पहले भी कई बार जनसुनवाई और संबंधित दफ्तरों के चक्कर काट चुके थे और लिखित शिकायतें भी दी थीं लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। इसी प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर उनके पिता ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

न्याय के दरवाजे पर ही क्यों थमी सांसें? उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल

यदि कोई आम नागरिक या अन्नदाता सरकार द्वारा तय किए गए ‘न्याय के मंच’ यानी जनसुनवाई तक पहुंचता है और वहां उसे मौत को गले लगाना पड़ता है, तो यह पूरी प्रशासनिक मशीनरी के लिए बेहद शर्मनाक है।

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फिलहाल इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद जिले के किसान संगठनों और आम जनता में गहरा आक्रोश है। परिजनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही दोषियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

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