देहरादून। प्रदेश के पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपने एक्स हैंडल पर ट्वीट कर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पहले ही शिखर सम्मेलन में 73 करोड़ रुपये खर्च हुए। ज़मीन पर निवेश कितना आया? उसका ब्यौरा जुटाने में अब तक सरकार की मशीनरी लगी हुई है। कोई स्पष्ट ब्यौरा उपलब्ध नहीं है। दूसरे वैश्विक औद्योगिक शिखर सम्मेलन में 100 करोड़ रुपये से कुछ अधिक खर्च हुए और राज्य के हिस्से में 100–150 के करीब आरा मशीनें, आटा चक्कियाँ तथा इस प्रकार के छोटे व्यक्तिगत प्रयासों से लगने वाले उद्यम लगे।

पीएम की उपस्थिति में सपने दिखाए गए

हरीश रावत ने कहा कि देश ही नहीं, दुनिया के नामचीन उद्योगपति आए। प्रधानमंत्री जी की उपस्थिति में बहुत सपने दिखाए गए। मगर निजी क्षेत्र, विशेष तौर पर औद्योगीकरण में निवेश की स्थिति यह है कि नए उद्योग तो अलग रहे, 500 से अधिक छोटी इकाइयाँ सिडकुल में पिछले कुछ वर्षों के भीतर बंद हो गई हैं। रोजगार के कुछ नए माध्यम ऑनलाइन व्यापार आदि का सहारा लोगों को मिल जा रहा है और कुछ मोबाइल का सहारा है।

लोग अपने मोबाइल में इतने मस्त हैं कि बेरोजगारी का एहसास उन्हें उतनी गहराई तक नहीं कचोट पा रहा है, जिससे वे सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा प्रकट कर सकें। मगर इस निवेश शिखर सम्मेलन का ढोल भी चौराहे पर फूट गया है। कुछ खोजी लोग इस काम में लगे हैं। मैं उन्हें शाबाशी देना चाहता हूं।

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हरीश रावत ने आगे कहा कि इसलिए पिछली बार समाचार था कि सरकार ने 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा विज्ञापनों पर खर्च किए। कांग्रेस की सरकार के वक्त में केदारनाथ त्रासदी के नाम से जिस भयावह मंजर को उत्तराखंड ने झेला और पुनर्निर्माण व पुनर्वास का जो काम तत्कालीन सरकार ने किया। शायद उस सरकार की गलती थी कि उन्होंने एक बार भी केदारनाथ पुनर्निर्माण के कार्य का सरकारी विज्ञापन नहीं दिया। धारणा रही कि आम आदमी का पैसा आम आदमी के विकास और लोक कल्याण पर खर्च हो, मगर चकाचौंध की दुनिया में विज्ञापनों का भी अपना महत्व है।

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आजकल आप टीवी के विज्ञापन देखिए तो कई राज्यों में गरीबी, बेरोजगारी समाप्त हो गई है, महिलाओं पर अत्याचार बंद हो गए हैं और हमारे गांव की बहनें सभी लखपति दीदी हो गई हैं। अस्पताल का इलाज तो इतना सस्ता, अस्पताल का इलाज और शिक्षा तो इतनी सस्ती हो गई है कि किसी की जेब पर कोई बोझ ही नहीं पड़ रहा है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तीन साल में 100 करोड़ खर्च किए विज्ञापनों पर और आज के निजाम ने एक साल में 1000 करोड़ खर्च किए।