हरियाणा के किसान अब तंजानिया और केन्या जैसे अफ्रीकी देशों में खेती करेंगे। मुख्यमंत्री की 'गो ग्लोबल' योजना के तहत एमडीएच कंपनी के साथ बड़ा समझौता हुआ है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के किसानों के लिए अब खेती की सीमाएं देश तक सीमित नहीं रहेंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ‘गो ग्लोबल’ अप्रोच के तहत राज्य के किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) अब तंजानिया, केन्या सहित अन्य अफ्रीकी देशों में खेती और कृषि कारोबार के अवसरों से जुड़ सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार और आधुनिक कृषि मॉडल से जोड़ना है।

पंचकूला के मोरनी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में देश की प्रतिष्ठित मसाला कंपनी एमडीएच और हरियाणा के छह किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के बीच महत्वपूर्ण करार हुआ। विदेश सहयोग विभाग और बागवानी विभाग की इस संयुक्त पहल के तहत मोरनी क्षेत्र में अदरक, हल्दी, मिर्च सहित मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। एमडीएच किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, विपणन और खरीद संबंधी सहयोग भी उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें कृषि उद्यमिता, मूल्य संवर्धन और वैश्विक व्यापार से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना चाहती है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रारंभिक चरण में करीब 4 हजार एकड़ क्षेत्र में खेती शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। साथ ही प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को नुकसान होने पर भरपाई और बाजार भाव से 10 प्रतिशत अधिक मूल्य देने की व्यवस्था भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में यदि हरियाणा के एफपीओ तंजानिया, केन्या या अन्य अफ्रीकी देशों में भूमि लेकर अदरक, हल्दी और मिर्च जैसी मसाला फसलों की खेती करते हैं तो एमडीएच वहां तैयार फसलों की खरीद में भी रुचि दिखाएगी। इससे पहली बार हरियाणा के किसानों को विदेशों में खेती और कृषि कारोबार से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

एमडीएच के मालिक राजीव गुलाटी ने हरियाणा सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी पेस्टिसाइड-फ्री और प्रीमियम क्वालिटी कृषि उत्पादों के लिए मजबूत प्रोक्योरमेंट सिस्टम विकसित करने को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और हरियाणा ग्लोबल स्पाइस इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा सकेगा।