Haryana TET Exemption : चंडीगढ़। हरियाणा सहित देशभर में वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से छूट मिलने की संभावनाओं पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट रुख अपना लिया है। लोकसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने कहा कि टीईटी शिक्षक बनने के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता है और इसे समाप्त करने या पुराने शिक्षकों के लिए अलग नियम बनाने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। सरकार ने अपने पक्ष को सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसलों के आधार पर भी सही ठहराया।
सांसदों ने उठाया पुराने शिक्षकों का मुद्दा
लोकसभा में यह विषय हरियाणा के सोनीपत से सांसद सतपाल ब्रह्मचारी और हिसार से सांसद जयप्रकाश ने उठाया। दोनों सांसदों ने केंद्र सरकार से पूछा कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी, जब टीईटी लागू नहीं था। ऐसे में क्या इन शिक्षकों के लिए कोई विशेष व्यवस्था या छूट देने पर विचार किया जा रहा है।
केंद्र ने बताया क्यों जरूरी है TET
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लिखित उत्तर में कहा कि शिक्षक भर्ती राज्यों का विषय है, लेकिन शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत आने वाले स्कूलों में टीईटी न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को सर्वोच्च न्यायालय पहले ही वैध ठहरा चुका है। इसलिए फिलहाल टीईटी से छूट देने या वैकल्पिक पात्रता लागू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।
केवल समयसीमा बढ़ी, नियम नहीं बदले
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर 2025 के फैसले में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखा था। बाद में मई 2026 में समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रभावित शिक्षकों को राहत देते हुए केवल परीक्षा पास करने की समयसीमा बढ़ाई। अब ऐसे शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर मिलेगा। हालांकि पात्रता संबंधी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नियमित परीक्षा कराने की सलाह
केंद्र सरकार ने सदन को यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और संबंधित परीक्षा एजेंसियों को सलाह दी है कि टीईटी का आयोजन नियमित रूप से किया जाए। यदि संभव हो तो वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि कार्यरत शिक्षक और नए अभ्यर्थी समय पर पात्रता हासिल कर सकें।
शिक्षकों के लिए क्या है संदेश
केंद्र सरकार के ताजा जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए अलग से छूट या विशेष श्रेणी बनाए जाने की संभावना फिलहाल नहीं है। ऐसे सभी शिक्षकों को निर्धारित समयसीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। वर्तमान नियमों के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा पास करना ही उनके लिए वैधानिक रूप से उपलब्ध विकल्प है।
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