सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजस्व न्याय व्यवस्था अब तेजी से डिजिटल हो रही है. राजस्व परिषद ने फैसला किया है कि अब उसके न्यायालयों में मामलों की सुनवाई मूल अभिलेखों के बजाय उनकी प्रमाणित स्कैन प्रतियों के आधार पर की जाएगी. नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है.
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने कहा कि इस फैसले के बाद अब सरकारी दस्तावेजों को बार-बार एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे महत्वपूर्ण अभिलेखों के गुम होने, क्षतिग्रस्त होने या समय पर उपलब्ध न होने जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी और मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी.
नई व्यवस्था के तहत ऐसे होगा काम
नई व्यवस्था के तहत अधीनस्थ न्यायालयों को सभी दस्तावेजों की स्पष्ट और क्रमवार स्कैन कॉपी भेजनी होगी. इनमें आदेश पत्र, नोटशीट, मानचित्र और अन्य जरूरी अभिलेख शामिल होंगे. साथ ही संबंधित रिकॉर्ड कीपर का प्रमाण-पत्र लगाना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि दस्तावेजों की विश्वसनीयता बनी रहे.
विशेष परिस्थितियों में ही तलब होंगे मूल अभिलेख
राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही मूल अभिलेख मांगे जाएंगे और इसके लिए न्यायालय को कारण दर्ज करना होगा. इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध हो सकेगी. भविष्य में इस पूरी व्यवस्था को आरसीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन संचालित करने की तैयारी है. इससे राजस्व न्यायालयों में ई-गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी तथा पारदर्शिता बढ़ेगी.
सभी डीएम व कमिश्नर को निर्देश जारी
राजस्व परिषद ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को नई व्यवस्था का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कोई अधूरी, अस्पष्ट या बिना प्रमाणित स्कैन कॉपी भेजी जाती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

