वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। हाईकोर्ट ने दुर्ग जिले के चिकित्सक डॉ. दुष्यंत खोसला के विरुद्ध पारित जिला बदर (Externment) आदेश एवं गृह विभाग द्वारा अपील निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने माना कि जिला बदर की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत की गई तथा वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। यह निर्णय जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल एवं जस्टिस नरेश चंद्रवंशी की खंडपीठ (डीबी) ने पारित किया।

सुनवाई का उचित अवसर नहीं देने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रद्धा राज ज्योतिषी, प्रमांशु शर्मा एवं संदीप कुमार तिवारी ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया था कि जिला प्रशासन ने बिना प्रभावी सुनवाई का अवसर दिए, गवाहों के बयान पहले ही दर्ज कर लिए तथा जिरह और बचाव का अवसर नहीं दिया। साथ ही केवल लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर जिला बदर का आदेश पारित कर दिया गया।
कोर्ट ने क्या कहा?
खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि जिला बदर जैसा आदेश किसी व्यक्ति के निवास, आवागमन और आजीविका के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है, इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वैधानिक प्रक्रिया का कड़ाई से पालन आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आपराधिक प्रकरण दर्ज होना या लंबित होना जिला बदर का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता तथा अभिलेखों में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था जिससे यह सिद्ध हो कि याचिकाकर्ता की गतिविधियों से लोक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने 8 जनवरी 2026 के जिला बदर आदेश तथा 7 मई 2026 के अपीलीय आदेश को निरस्त करते हुए याचिका स्वीकार कर ली।
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