कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क में 8 बाघों की मौत मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। वकीलों का तर्क है कि मौत के पहले बाघों की शारीरिक हालत कमजोर थी। वकीलों का तर्क है कि मौत का कारण कैनाइन डिस्पेंटर वायरस सीडीवी भी माना जा रहा है। जस्टिस विवेक जैन एवं जस्टिस एके निरंकारी की बेंच में सुनवाई हुई है। मामले में अगली सुनवाई 22 जून को होगी।

क्या है पूरा मामला

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों की कब्रगाह बनता जा रहा है। बीते ढाई महीने के अंदर 8 बाघों की मौत हो चुकी है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था। 21 नवंबर से 2 फरवरी के बीच 8 बाघों की मौत हुई थी। 4 बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के अंदर हुई। 4 बाघों की मौत सामान्य वन क्षेत्र में हुई। दो टाइगर की मौत आपसी संघर्ष, एक टाइगर की मौत कुएं में डूबने से, एक की प्राकृतिक बीमारी जबकि चार बाघों की मौत की वजह बताई गई करंट। रिपोर्ट में कहा गया बाघों के अवशेष पूरी तरह सुरक्षित है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को स्टेटस रिपोर्ट पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए। टाइगर स्टेट होने के बाद भी साल 2025 में मध्यप्रदेश में 54 टाइगरों की मौत। भोपाल के वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने जनहित याचिका लगाई है।

2022 से अब तक बाघों की मौतें

साल 2022 में 43 बाघों की मौतें
साल 2023 में 45 बाघों की मौतें
साल 2024 में 46 बाघों की मौतें
साल 2025 में सबसे ज्यादा 54 बाघों की मौत
साल 2026 में अब तक 7 बाघों की मौत
4 साल में कुल 194 बाघों की मौत

प्रदेश में 1973 में टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी

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