हिसार। खालसा इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम मालिक हैप्पी चोपड़ा उर्फ प्रवीण (38) की मौत के बाद परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया है। शव को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है। परिवार का आरोप है कि फाइनेंसर कर्ज की रकम एकमुश्त चुकाने का दबाव बना रहा था। पत्नी प्रीति चोपड़ा ने इंसाफ की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह उनका परिवार उजड़ गया, वैसे ही फाइनेंसर भी उजड़े।

25 लाख रुपए चुकाने का दबाव बनाने का आरोप

पत्नी प्रीति चोपड़ा ने आरोप लगाया कि फाइनेंसर 25 लाख रुपए का कर्ज एकमुश्त चुकाने का दबाव बना रहा था। वह ग्राहकों को उनका घर दिखाने के लिए लाता था और कहता था कि घर बिकवाएगा। परिवार के मुताबिक, बच्चों को उठवाने की धमकी भी दी गई थी।

वीरवार को हैप्पी ने घर में अपनी लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार ली थी। परिवार का कहना है कि कर्ज को लेकर लगातार बनाए जा रहे दबाव से वह परेशान थे।

हर महीने 50 हजार रुपए ब्याज देने का दावा

परिजनों के मुताबिक, फाइनेंसर ढाई प्रतिशत मासिक ब्याज के हिसाब से करीब 50 हजार रुपए वसूल रहा था। पिछले दो महीने से वह ब्याज समेत पूरी रकम मांग रहा था। इसके लिए हैप्पी को बार-बार फोन किए जा रहे थे।

हैप्पी के छोटे भाई चरणजीत चोपड़ा ने बताया कि एक सितंबर को हैप्पी पूरी पेमेंट देने के लिए तैयार हो गया था। इसके बाद फाइनेंसर सुरेंद्र और उसके भतीजे घोलू ने 20 लाख रुपए की जगह 25 लाख रुपए मांगने शुरू कर दिए।

एक घंटे में करीब 27 बार फोन किया

दैनिक भास्कर के मुताबिक, हैप्पी चोपड़ा उर्फ प्रवीण के मोबाइल की कॉल डिटेल सामने आई है। इसमें दोपहर करीब 12 बजे से एक बजे के बीच करीब 27 कॉल किए जाने की जानकारी है।

परिवार के मुताबिक, दोपहर करीब 12:23 बजे हैप्पी की फाइनेंसर से 3 मिनट 40 सेकंड तक बात हुई। इसके बाद भी फोन आते रहे। दोपहर 12:59 बजे आखिरी कॉल की गई, जिसे हैप्पी ने नहीं उठाया। इसके करीब 10 मिनट बाद उसने खुद को गोली मार ली।

तीन साल पहले शुरू किया था इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम

हैप्पी 12 क्वार्टर रोड के रहने वाले थे। इसी इलाके में उनका खालसा इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम था। छोटे भाई चरणजीत ने बताया कि हैप्पी ने करीब तीन साल पहले इलेक्ट्रॉनिक सामान का शोरूम शुरू किया था।

10 साल पहले लिया था 40 लाख रुपए का कर्ज

परिवार के अनुसार, शोरूम के ऊपर एक और मंजिल बनवाने के लिए हैप्पी ने करीब 10 साल पहले फाइनेंसर सुरेश से 40 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे। इसमें करीब 20 लाख रुपए की रकम बाकी थी।

हैप्पी हर महीने करीब 50 हजार रुपए ब्याज के तौर पर दे रहे थे। परिजनों का कहना है कि फाइनेंसर अब रकम को प्रॉपर्टी में लगाना चाहता था और पूरी रकम ब्याज समेत लौटाने का दबाव बना रहा था।

दो दिन से घर आ रहे थे फाइनेंसर के रिश्तेदार

परिजनों के मुताबिक, फाइनेंसर सुरेश ने अचानक 20 लाख की जगह 25 लाख रुपए मांगने शुरू कर दिए। सुरेश के भतीजे गोलू और सोनू एक दिन पहले शाम को और वीरवार सुबह भी हैप्पी के पास आए थे।

भाई चरणजीत का कहना है कि रकम को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। इससे हैप्पी मानसिक रूप से परेशान थे।

परिवार ने फिलहाल शव लेने से इनकार किया है। शव अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में रखा गया है। परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है।

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