हिसार में हरियाणा सरकार की नीतियों, निजीकरण, स्मार्ट मीटरिंग और अलग कृषि वितरण निगम बनाने के विरोध में हजारों बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों ने रोष प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा और मांगों का समाधान न होने पर 11 से 13 अगस्त तक तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी।
विनोद सैनी, हिसार। हरियाणा सरकार की नीतियों के खिलाफ, बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों की मांगों के समाधान, कृषि वितरण निगम अलग बनाने, गुरुग्राम-नूंह पैरेलल लाइसेंस जारी करने और स्मार्ट मीटरिंग योजना के विरोध में आज हजारों की संख्या में बिजली कर्मचारी व इंजीनियर स्थानीय राजगढ़ रोड स्थित अधीक्षक अभियंता कार्यालय पर रोष प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए।
विरोध प्रदर्शन की संयुक्त अध्यक्षता हरियाणा पावर इंजीनियर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बलजीत बेनीवाल व एचएसईबी सर्किल सचिव अनिल पहल ने की। मंच संचालन हरियाणा एससी-एसटी-बीसी सर्किल सचिव हंसराज व ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन सर्किल सचिव ओमप्रकाश वर्मा ने किया। हिसार जिले के कोने-कोने से आए कर्मचारियों में सभी यूनियनों के एकजुट होने पर भारी उत्साह था और हरियाणा सरकार की नीतियों के खिलाफ गुस्सा देखने को मिला।
विभिन्न संगठनों ने दिया समर्थन
आज के इस प्रदर्शन में किसान, मजदूर, व्यापारी, नागरिक मंच, मुस्लिम कल्याण कमेटी, विकलांग अधिकार मंच, रिटायर्ड कर्मचारी और सैकड़ों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।
सभी बिजली कर्मचारी भीषण गर्मी व उमस भरे वातावरण में हरियाणा सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अधीक्षक अभियंता के कार्यालय से उपायुक्त कार्यालय (लघु सचिवालय) तक प्रदर्शन करते हुए पहुंचे। वहां उन्होंने हिसार उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री हरियाणा के नाम ज्ञापन सौंपा।
हरियाणा सरकार द्वारा लगातार निजीकरण की नीतियों को बढ़ावा देने और भविष्य में रोजगार के संकट पैदा होने के विरोध में सभी यूनियनें एकजुट होकर इस आंदोलन में शामिल हुईं। इसमें ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन, एचएसईबी वर्कर यूनियन हेड ऑफिस भिवानी, ऑल हरियाणा अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग यूनियन और हरियाणा पावर इंजीनियर एसोसिएशन एक मंच पर आईं।
निजीकरण से बढ़ेगा आम जनता पर बोझ
वक्ताओं, जिनमें पावर इंजीनियर महासचिव रविन्द्र घणघस व ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन के राज्य कैशियर सुरेंद्र यादव शामिल थे, ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम व नूंह में पैरेलल लाइसेंस जारी करने के बाद आम उपभोक्ता पर बिजली के बढ़े हुए रेटों का बोझ बढ़ेगा। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की वार्षिक रेवेन्यू लगभग 19,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से अकेला गुरुग्राम वार्षिक 10,000 करोड़ रुपये देता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अकेले गुरुग्राम को पूंजीपति खरीदने को तैयार हैं, क्योंकि उनको बना-बनाया ढांचा प्रयोग के लिए मिल रहा है। गुरुग्राम में उच्च रेटों पर व्यावसायिक संस्थानों से बिल लिया जा रहा है और क्रॉस सब्सिडी के माध्यम से गरीब जनता व किसानों को सब्सिडी जारी की जा रही है। प्राइवेट कंपनियों के पास जाने के बाद आम जनता को मिलने वाली सब्सिडी खत्म हो जाएगी। प्राइवेट कंपनियां केवल मुनाफे के लिए इन बिजली क्षेत्रों को खरीदना चाहती हैं, उनका मकसद आम जनता को राहत देना नहीं है।
नए कृषि वितरण निगम का विरोध
नेताओं ने कहा कि नया कृषि वितरण निगम अलग बनाने से किसानों को कोई राहत मिलने वाली नहीं है, बल्कि उनकी समस्याएं और बढ़ेंगी। उच्च संस्थानों से उच्च रेट पर मिलने वाली क्रॉस सब्सिडी बंद हो जाएगी। इस नए कृषि निगम को पहले से 5,427 करोड़ रुपये का घाटा विरासत में मिल रहा है। सब्सिडी नहीं मिलने पर 7,17,247 किसान उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि हरियाणा में बिजली कृषि के लिए वर्ष 2010 में अलग से फीडर बना दिए गए थे और मौजूदा समय में कृषि उपभोक्ताओं को अलग से बिजली का शेड्यूल जारी करके सप्लाई दी जा रही है। ऐसे में हरियाणा में नया कृषि वितरण निगम बनाने की जरूरत नहीं है, लेकिन पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए इसे थोपा जा रहा है।
एचएसईबी यूनियन के नेता विकास नेहरा व एससी-एसटी-बीसी यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजकुमार महला ने कहा कि सरकार 15 अगस्त को नए कृषि वितरण निगम का नोटिफिकेशन जारी करने का ऐलान कर रही है, जिसे किसान, कर्मचारी व उपभोक्ता किसी भी सूरत में सहन नहीं करेंगे।
चरणबद्ध आंदोलन और हड़ताल का ऐलान
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने संज्ञान नहीं लिया, तो बिजली कर्मचारी और इंजीनियर मिलकर 3 से 5 अगस्त तक पूरे प्रदेश में यूनिट स्तर पर किसानों व उपभोक्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन और कन्वेंशन करेंगे। इसके बाद 6 से 8 अगस्त तक सभी सब-डिविजनों पर प्रदर्शन कर आम जनता के बीच जाएंगे। 10 अगस्त को किसान मोर्चा व ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन में शामिल होंगे।
यदि इसके बाद भी हरियाणा सरकार ने मांगों का समाधान नहीं किया, तो पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर 11, 12 और 13 अगस्त को तीन दिवसीय राज्यस्तरीय हड़ताल करते हुए अपना विरोध दर्ज करवाएंगे। यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो संयुक्त मोर्चा दोबारा बैठक कर आगे की रणनीति बनाएगा।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
- नया कृषि वितरण निगम बनाना बंद किया जाए।
- स्मार्ट मीटर व प्राइवेट लाइसेंसी योजना को रद्द किया जाए।
- तमाम कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
- सभी प्रकार के भत्ते महंगाई के अनुसार लागू किए जाएं और जोखिम भत्ता दिया जाए।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए।
- एनपीएस से रिटायर्ड कर्मचारियों को मेडिकल भत्ता व बिलों का भुगतान किया जाए।
- बिजली निगमों में खाली पड़े पदों पर नियमित भर्ती हो।
- महिलाओं के लिए क्रेच रूम बनवाए जाएं, इंटर यूटिलिटी लागू हो और रिजर्वेशन में बैकलाग पूरा किया जाए।
- कॉमन कैडर के तमाम कर्मचारियों की पदोन्नति की जाए।
- एक्सग्रेशिया पॉलिसी पर लगाई गईं शर्तें हटाई जाएं।
- एचपीजीसीएल व एचवीपीएनएल में पदों का पुनर्गठन किया जाए।
आज के विरोध प्रदर्शन में रिशीकेश राजली, अनूप सूरा, किसान नेता राजीव, राज्य अध्यक्ष दिलबाग हुड्डा, होशियार खान, संदीप सहारण, जसवंत सिंह, जगमिंदर पुनिया, पूनम कूंडू, सूबे सिंह कादियान, दलिप सोनी, सतेन्द्र सहारण, अमृत शर्मा, अशोक सैनी, इंजीनियर सुमित, राहुल महला, मोहनलाल जांगड़ा आदि ने भाग लिया और अपने विचार रखे।


