Technology Desk: आज के समय में बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, पेमेंट, टिकट बुकिंग और मनोरंजन जैसे कई काम मोबाइल ऐप्स के जरिए आसानी से किए जा सकते हैं। दुनियाभर में हर साल करोड़ों ऐप्स डाउनलोड किए जाते हैं। इसी बढ़ती निर्भरता के बीच फर्जी ऐप्स भी मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ी परेशानी बन रहे हैं। ऐसे ऐप्स देखने में बिल्कुल असली ऐप जैसे लग सकते हैं, लेकिन इन्हें फोन में इंस्टॉल करने पर निजी जानकारी चोरी होने, फोन की सुरक्षा प्रभावित होने और आर्थिक नुकसान का खतरा रहता है।
गूगल प्ले स्टोर पर समय-समय पर फर्जी और खतरनाक ऐप्स की पहचान करके उन्हें हटाया जाता है। इसके बावजूद किसी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी सही तरीके से जांच करना जरूरी है। कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर फेक ऐप्स की पहचान की जा सकती है।
डाउनलोड की संख्या और रिव्यू जरूर देखें
किसी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी डाउनलोड संख्या और यूजर रिव्यू चेक करें। लंबे समय से मौजूद लोकप्रिय ऐप्स के डाउनलोड आमतौर पर काफी ज्यादा होते हैं। हालांकि, केवल डाउनलोड संख्या देखकर किसी ऐप को सुरक्षित नहीं माना जा सकता, क्योंकि कुछ फर्जी ऐप्स भी बड़ी संख्या में डाउनलोड किए जा चुके होते हैं।
रिव्यू और रेटिंग भी उपयोगी संकेत दे सकते हैं। अगर कई यूजर्स ऐप के खराब व्यवहार, संदिग्ध गतिविधि, विज्ञापनों की भरमार, डेटा चोरी या दूसरे किसी खतरे की शिकायत कर रहे हैं, तो ऐसे ऐप से सावधान रहना चाहिए।
रिलीज डेट पर भी दें ध्यान
ऐप की रिलीज डेट देखना भी जरूरी है। किसी लोकप्रिय सेवा का आधिकारिक ऐप लंबे समय से उपलब्ध हो सकता है, जबकि उसी नाम से मिलता-जुलता कोई नया ऐप हाल ही में बनाया गया हो।
हालांकि, नया ऐप होना अपने आप में उसे फेक साबित नहीं करता। इसलिए रिलीज डेट को दूसरे संकेतों, जैसे डेवलपर का नाम, रिव्यू और आधिकारिक वेबसाइट की जानकारी के साथ मिलाकर देखना चाहिए।
ऐप कौन-कौन सी परमिशन मांग रहा है, यह जांचें
ऐप इंस्टॉल करते समय सबसे जरूरी चीजों में से एक उसकी परमिशन होती है। किसी ऐप को वही एक्सेस मांगना चाहिए, जिसकी उसके काम के लिए जरूरत हो।
उदाहरण के लिए, फोटो एडिटिंग ऐप को फोटो और वीडियो तक पहुंच की जरूरत हो सकती है। लेकिन अगर वही ऐप बिना किसी स्पष्ट वजह के माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट्स, लोकेशन या दूसरी संवेदनशील जानकारी का एक्सेस मांग रहा है, तो सावधान हो जाना चाहिए।
अनावश्यक परमिशन मांगने वाला ऐप आपकी निजी जानकारी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
एक जैसे नाम और आइकन वाले ऐप्स से रहें सावधान
गूगल प्ले स्टोर पर किसी ऐप को सर्च करने पर कई मिलते-जुलते रिजल्ट दिखाई दे सकते हैं। फर्जी ऐप बनाने वाले असली ऐप के नाम, लोगो, आइकन और डिजाइन की नकल कर सकते हैं।
इसलिए केवल आइकन देखकर ऐप डाउनलोड नहीं करना चाहिए। ऐप का पूरा नाम, डेवलपर और अन्य जानकारी ध्यान से जांचें। नाम में मामूली स्पेलिंग बदलाव या असामान्य शब्द भी संदेह का कारण हो सकते हैं।
डेवलपर का नाम जरूर जांचें
ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर का नाम देखना एक महत्वपूर्ण कदम है। किसी लोकप्रिय कंपनी के आधिकारिक ऐप का डेवलपर नाम भी आमतौर पर उसी कंपनी या उसके आधिकारिक डेवलपर से जुड़ा होता है।
अगर डेवलपर का नाम अजीब है, उसमें स्पेलिंग की गलती है या वह कंपनी के आधिकारिक नाम से मेल नहीं खाता, तो ऐप को डाउनलोड करने से पहले अतिरिक्त जांच करनी चाहिए।
प्ले स्टोर पर डेवलपर के नाम पर क्लिक करके उसके दूसरे ऐप्स भी देखे जा सकते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि डेवलपर लंबे समय से ऐप्स बना रहा है या हाल ही में कई संदिग्ध ऐप्स प्रकाशित किए गए हैं।
ऐप का डिस्क्रिप्शन और स्क्रीनशॉट पढ़ें
किसी ऐप के प्ले स्टोर पेज पर दिए गए डिस्क्रिप्शन को ध्यान से पढ़ना चाहिए। आधिकारिक ऐप में आमतौर पर उसके फीचर्स और काम करने के तरीके की स्पष्ट जानकारी दी जाती है।
अगर डिस्क्रिप्शन में बहुत ज्यादा वर्तनी या भाषा संबंधी गलतियां हैं, जानकारी अधूरी है या उसमें असामान्य दावे किए गए हैं, तो सावधानी बरतनी चाहिए।
इसी तरह स्क्रीनशॉट भी देखें। अगर स्क्रीनशॉट धुंधले हैं, ऐप के इंटरफेस से मेल नहीं खाते या दूसरे लोकप्रिय ऐप की हूबहू नकल दिखाई देते हैं, तो ऐप की विश्वसनीयता की दोबारा जांच करें।
आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी मिलाएं
अगर किसी ऐप को लेकर जरा भी संदेह है, तो संबंधित कंपनी या सेवा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां देखें कि क्या कंपनी ने अपने मोबाइल ऐप का लिंक दिया है।
अगर किसी बैंक, शॉपिंग प्लेटफॉर्म या दूसरी ऑनलाइन सेवा की वेबसाइट पर उसके आधिकारिक ऐप का उल्लेख है, तो वहां दिए गए लिंक से ऐप की पहचान करना अधिक सुरक्षित तरीका हो सकता है।
किसी अनजान वेबसाइट, सोशल मीडिया पोस्ट या मैसेज में दिए गए लिंक से ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए।
इंस्टॉल करने से पहले सुरक्षा जांच करें
ऐप की सुरक्षा को लेकर संदेह होने पर फोन में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। एंड्रॉयड डिवाइस में गूगल प्ले प्रोटेक्ट ऐप्स को स्कैन करके संभावित रूप से हानिकारक ऐप्स की पहचान करने में मदद करता है।
जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद मोबाइल सिक्योरिटी टूल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, किसी सुरक्षा ऐप को भी डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर और आधिकारिक स्रोत की जांच करना जरूरी है।
फेक ऐप इंस्टॉल हो जाए तो क्या करें?
अगर गलती से कोई संदिग्ध ऐप फोन में इंस्टॉल हो गया है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सबसे पहले ऐप की गतिविधियों और मांगी गई परमिशन की जांच करें। संदिग्ध ऐप को अनइंस्टॉल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर डिवाइस की सुरक्षा जांच करनी चाहिए।
अगर ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और वह नकली या किसी दूसरे ऐप की नकल लगता है, तो उसे प्ले स्टोर पर रिपोर्ट भी किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित ऐप के पेज पर जाकर रिपोर्ट करने का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है और समस्या की वजह बताई जा सकती है।
खास तौर पर बैंकिंग, पेमेंट या शॉपिंग से जुड़े ऐप्स के मामले में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। किसी संदिग्ध ऐप में बैंक डिटेल, कार्ड की जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी दर्ज नहीं करनी चाहिए।
फेक ऐप्स अक्सर असली ऐप की तरह दिखने के लिए नाम, आइकन और डिजाइन की नकल करते हैं। इसलिए किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके डाउनलोड, रिव्यू, रिलीज डेट, परमिशन, डेवलपर, डिस्क्रिप्शन और आधिकारिक स्रोत की जांच करना जरूरी है।
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