हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित IAS संतोष वर्मा फर्जी कोर्ट आदेश मामले में पुलिस ने एक बड़ी वैधानिक कार्रवाई पूरी की है। मामले में आरोपी निलंबित जज अमन सिंह भूरिया के खिलाफ पुलिस ने गिरफ्तारी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है। हालांकि, हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत (Anticipated Bail) मिलने के कारण उन्हें कागजी कार्रवाई के बाद रिहा कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला साल 2021 का है, जब संतोष वर्मा का नाम ‘IAS अवॉर्ड’ (प्रमोशन) के लिए चयनित हुआ था। आरोप है कि तत्कालीन सीजेएम (CJM) अमन सिंह भूरिया ने विभागीय अड़चनों को दूर करने के लिए IAS संतोष वर्मा को एक आपराधिक मामले में बरी (दोषमुक्त) किए जाने का एक फर्जी अदालती आदेश जारी कर दिया था। दरअसल, संतोष वर्मा के खिलाफ इंदौर के लसूड़िया थाने में एक आपराधिक मामला दर्ज था, जिसे दबाने के लिए कोर्ट के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे।

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सेवानिवृत्त जज और टाइपिस्ट भी घेरे में
इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा होने के बाद इंदौर के एमजी रोड थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में केवल अमन सिंह भूरिया ही नहीं, बल्कि एक सेवानिवृत्त (Retired) जज और कोर्ट के एक टाइपिस्ट को भी सह-आरोपी बनाया था।

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पुलिस कार्रवाई और रिहाई

पुलिस लगातार इस मामले में कार्रवाई कर रही थी। आरोपी निलंबित जज अमन सिंह भूरिया को पहले ही उच्च न्यायालय (High Court) से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी। इसी आदेश के तहत एमजी रोड थाना पुलिस ने गिरफ्तारी की कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और मुचलके पर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।

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