हरियाणा के चर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए श्रम कल्याण बोर्ड के दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर मिलीभगत करके करीब 50 करोड़ रुपये की सरकारी राशि को शेल कंपनियों में ट्रांसफर करने का गंभीर आरोप है।
पंचकूला। हरियाणा के बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने एक और बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में जांच एजेंसी ने हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड (एचएलडब्ल्यूबी) के अकाउंट ऑफिसर जुगल किशोर और अनुबंध पर कार्यरत अकाउंट क्लर्क अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई की विशेष टीम ने दोनों आरोपियों को चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया था और संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस सनसनीखेज घोटाले के तार कई रसूखदार लोगों से जुड़े होने के कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
दो दिन का रिमांड मंजूर
अदालत में दोनों आरोपियों को पेश करने के बाद जांच एजेंसी ने मामले की गहराई से तफ्तीश करने और सबूतों को जुटाने के लिए दो दिनों का पुलिस रिमांड हासिल किया है। अदालत की सुनवाई के दौरान आरोपी अमित कुमार के वकील यवनीत ढाकला ने रिमांड का कड़ा विरोध करते हुए दलील दी कि उनका मुवक्किल पहले से ही जांच में लगातार सहयोग दे रहा है। सीबीआई के अनुसार यह पूरा मामला श्रम विभाग बोर्ड की करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी सरकारी राशि के अवैध गबन से जुड़ा हुआ है। इस जालसाजी में फर्जी बैंकिंग प्रक्रियाओं का सहारा लेकर सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से विभिन्न शेल कंपनियों के खातों में पहुंचाया गया था।
वित्तीय दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर
सीबीआई के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आरोपी जुगल किशोर साल 2024 से हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड में अकाउंट ऑफिसर के रूप में तैनात था और वित्तीय लेन-देन का मुख्य हस्ताक्षरकर्ता था। आरोप है कि बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की मंजूरी होने के बावजूद उसने जानबूझकर नया सेविंग अकाउंट खुलवाने के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। विभागीय रिकॉर्ड में इस बचत खाते को खोलने का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। इसी तरह क्लर्क अमित कुमार ने निवेश से जुड़ी महत्वपूर्ण नोटशीट तैयार की लेकिन उसमें सेविंग अकाउंट का कोई जिक्र नहीं किया और पिछली तारीख में प्रविष्टि कर फर्जी दस्तावेजों को सत्यापित घोषित कर दिया।
चार वरिष्ठ अधिकारी जेल में
सीबीआई की जांच में यह भी साफ हुआ है कि बैंक अधिकारियों से गड़बड़ी की शुरुआती सूचना मिलने के बाद भी इन अधिकारियों ने मामले की कोई स्वतंत्र जांच नहीं करवाई। इस बड़े घोटाले में सीबीआई की टीम पूर्व में ही हरियाणा के तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पंकज अग्रवाल, आरके सिंह, प्रदीप डागर और एक आईएफएस अधिकारी विनीत श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर चुकी है। वर्तमान में ये चारों बड़े अधिकारी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। इस नई गिरफ्तारी के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में बैंक और विभाग के कुछ अन्य बड़े चेहरों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।

