पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार को SOP तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने खनन क्षेत्रों की हर छह महीने में 3D सैटेलाइट इमेजिंग कराने और जियो-कोऑर्डिनेट्स का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया।

चंडीगढ़। अरावली क्षेत्र में अवैध खनन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अवैध खनन पर प्रभावी निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए केंद्र सरकार को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट के निर्देश के तहत खनन क्षेत्रों की हर छह महीने में 3D सैटेलाइट इमेजिंग कराई जाएगी। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों के जियो-कोऑर्डिनेट्स (भौगोलिक निर्देशांक) का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि समय के साथ खनन गतिविधियों और पर्यावरणीय बदलावों की सटीक निगरानी की जा सके।

आम लोग भी कर सकेंगे अवैध खनन की शिकायत

अदालत ने यह सुझाव भी दिया कि खनन स्थलों से संबंधित सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं को सार्वजनिक मंच पर उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जाए। इससे आम नागरिक भी खनन क्षेत्रों पर नजर रख सकेंगे और नियमों के उल्लंघन या अवैध खनन की स्थिति में शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई तक इस संबंध में अपना प्रस्ताव और जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

चरखी दादरी के पिचोपा कलां में अवैध खनन का मामला

यह मामला चरखी दादरी जिले के पिचोपा कलां गांव में कथित अवैध खनन से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान आरोप लगाया गया कि स्वीकृत सीमा से अधिक क्षेत्र में खनन किया गया, जिससे अरावली की प्राकृतिक संरचना, पर्यावरण और कृषि भूमि को गंभीर नुकसान पहुंचा।

अदालत ने मामले की गंभीरता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया पर्यावरण को भारी क्षति और प्राकृतिक संसाधनों के व्यापक दोहन के संकेत मिलते हैं। हालांकि, अब तक इस नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं हो सकी है।

हाईकोर्ट के इस रुख से स्पष्ट है कि आने वाले समय में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर निगरानी के लिए तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा सकता है और खनन गतिविधियों की नियमित डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था तैयार की जा सकती है।