Independence Day Special : प्रतीक पटनायक, धमतरी. देश ने 15 अगस्त 1947 को आजादी की पहली सांस ली थी. उसी ऐतिहासिक दिन छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सुदूर वनांचल में बसे एक छोटे से गांव में भी आजादी की एक ऐसी निशानी रोपी गई, जो आज 80 साल बाद भी उस गौरवशाली पल की गवाही दे रही है. उड़ीसा सीमा से लगे घने जंगलों के बीच बसे भैसामुड़ा गांव में आजादी की खुशी में लगाया गया बरगद का एक नन्हा पौधा अब विशाल वृक्ष बन चुका है. यह सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि गांव की पीढ़ियों के लिए आजादी की जीवंत याद और देशभक्ति का प्रतीक बन गया है.
पीढ़ियां बदलीं, लेकिन बरगद आज भी वहीं खड़ा है

आजादी के बाद देश ने कई बदलाव देखे. पीढ़ियां बदलीं, गांव बदला और समय आगे बढ़ता गया, लेकिन यह बरगद आज भी उसी जगह मजबूती से खड़ा है. इसकी छांव ने गांव की कई पीढ़ियों को बड़ा होते देखा है. ग्रामीणों के मुताबिक गांव की महत्वपूर्ण बैठकें आज भी इसी पेड़ की छांव में होती हैं. इस तरह यह बरगद गांव के सामाजिक जीवन का भी हिस्सा बन चुका है.
हर राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगे को सलामी

भैसामुड़ा में इस बरगद का सम्मान किसी स्मारक से कम नहीं है. हर साल स्वतंत्रता दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर इसी पेड़ पर तिरंगा फहराया जाता है. ग्रामीण पूरे सम्मान और गर्व के साथ राष्ट्रध्वज को सलामी देते हैं. गांव के लोगों के लिए यह बरगद उस दिन की याद है, जब भारत ने सदियों की गुलामी से निकलकर आजादी हासिल की थी.
नई पीढ़ी के लिए बरगद बना आजादी का सबक
यह पेड़ सिर्फ बुजुर्गों की यादों तक सीमित नहीं है. गांव की नई पीढ़ी भी इस बरगद से आजादी का महत्व समझती है. एक ऐसी पीढ़ी, जिसने गुलामी का दौर नहीं देखा, उसके लिए यह विशाल पेड़ उस इतिहास को महसूस करने का माध्यम बन गया है. हर बार जब इस पर तिरंगा लहराता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाता है कि देश की आजादी कितनी अनमोल है.
अमूल्य विरासत का जीवंत प्रतीक है पेड़
दुनिया में ऐतिहासिक घटनाओं की याद में स्मारक बनाए जाते हैं, लेकिन धमतरी का भैसामुड़ा गांव इस मामले में बेहद अनोखा है. यहां आजादी की याद किसी पत्थर या इमारत में नहीं, बल्कि एक जीवंत बरगद के पेड़ में संजोई गई है. 15 अगस्त 1947 को रोपा गया यह पौधा आज विशाल वृक्ष बनकर न सिर्फ गांव की पहचान है, बल्कि आजादी की उस अमूल्य विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक सहेजा जा रहा है.
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