पीओके के रावलकोट में रविवार को पुलिस और जेएएसी प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में पुलिस अधिकारियों समेत 27 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। मासूम नागरिकों और विरोध कर रहे लोगों को इस तरह सरेआम गोली मारने की घटना के बाद भारत की प्रतिक्रिया आयी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मंत्रालय का इस मुद्दे पर नजर है। वहीं, भारत ने हिंसा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान द्वारा अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश है।
इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम पाकिस्तान की ओर से फर्जी खबरों और वीडियो का एक सिलसिला लगातार देख रहे हैं। यह अपनी विफलताओं को छिपाने और अपने मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने का पाकिस्तान का एक हताशा-पूर्ण प्रयास है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भीषण पुलिस बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके दुष्कर्मों और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।”
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने की हिंसा की निंदा
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने सोमवार को कहा कि वह पीओके में जारी हिंसा को लेकर चिंतित है। सोमवार को जारी बयान में एचआरसीपी ने नागरिकों और पुलिसकर्मियों दोनों की मौत, बल प्रयोग और संचार सेवाएं बंद किए जाने की कड़ी निंदा की। आयोग ने कहा, ”संवाद जरूरी है लेकिन जब तक इस क्षेत्र के लोगों को राजनीतिक अधिकार से वंचित रखा जाएगा, तब तक यह संवाद सार्थक नहीं हो सकता। शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए और शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।” आयोग ने केंद्र और स्थानीय सरकार दोनों से अपील की कि वे तनाव को और न बढ़ाएं, लोगों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करें और वार्ता के लिए प्रतिबद्ध हों।”
क्यों हो रहे विरोध प्रदर्शन?
दरअसल बीते कुछ वक्त से पीओके की जनता शहबाज सरकार और पीओके में उसकी कठपुतली सरकार के खिलाफ विरोध कर रही थी। यह विरोध बिजली , पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए हो रहे हैं। लेकिन विरोध की ये आवाज पाकिस्तानी हुक्मरानों को रास नहीं आई। इस बीच विरोध की सुलगती आवाज को शांत करने के लिए शहबाज सरकार ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया।
पाकिस्तानी सरकार इस इलाके के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार करती आई है। इस इलाके का प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा कर लिया गया है और इसके बदले सिर्फ जुल्मों सितम ही मिले हैं। Pok में विरोध तब तेज हुआ जब प्रशासन ने JAAC से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। बताया गया है कि प्रशासन ने JAAC को बैन कर दिया है और 9 जून को प्रस्तावित ‘लॉन्ग मार्च’ से पहले कई सुरक्षा उपाय लागू किए थे। आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से ही पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं। ऐसा करने से कम्युनिकेशन सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुई।
ड्यूटी पर जाने से जवानों का इनकार
हिंसक विरोध-प्रदर्शन के कारण एक तरफ जहां पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके सुलग रहा है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान पुलिस के जवान यहां ड्यूटी करने से इनकार कर रहे हैं। यह खुलासा सरकार के एक दस्तावेज से हुआ है। इसके मुताबिक पुलिस के जवान पीओके और गिलिगित में तैनाती मिलने के बावजूद ड्यूटी ज्वॉइन नहीं कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने ऐसे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई शुरू की है।
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