परवेज खान, यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कोट कलसिया में चल रहे सात दिवसीय भारतीय भाषा समर कैंप का सोमवार को शानदार समापन हो गया। यह खास समर कैंप (Summer Camp) बीते 2 जून से शुरू हुआ था, जो 8 जून तक लगातार चला। इस सात दिनों के शिविर का मुख्य मकसद स्कूली बच्चों में अपनी मातृभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान जगाना था। इसके साथ ही बच्चों के बातचीत करने के तरीके, उनके भाषा कौशल और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देना भी इस कैंप का बड़ा उद्देश्य रहा। पूरे हफ्ते चले इस कैंप में स्कूल के बच्चों ने बड़े ही उत्साह और अनुशासन के साथ हिस्सा लिया।

खेल-खेल में सीखीं भाषा की बारीकियां, पोस्टर और स्लोगन भी बनाए
इस सात दिनों के कैंप के दौरान बच्चों को किताबी पढ़ाई से अलग बेहद मजेदार और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा गया। स्कूल में रोज भाषा पर आधारित कई तरह के खेल, क्विज प्रतियोगिता, ग्रुप डिस्कशन (Group Discussion) और बातचीत की कला को सुधारने वाले सेशन रखे गए। इसके अलावा बच्चों ने भारतीय भाषाओं की खूबसूरती को दिखाने वाले रंग-बिरंगे पोस्टर और स्लोगन भी तैयार किए। बच्चों को देश की समृद्ध संस्कृति और भाषाओं के इतिहास को समझाने के लिए कई ज्ञानवर्धक वीडियो भी दिखाए गए। साथ ही पुराने पारंपरिक खेलों के जरिए बच्चों को आपसी तालमेल और टीम वर्क की सीख दी गई।

अंतिम दिन बच्चों ने लिया खास संकल्प, शिक्षकों ने बताया मातृभाषा का महत्व
कैंप के आखिरी दिन सभी छात्र-छात्राओं ने इस सात दिनों के दौरान सीखे गए अपने अनुभवों को सबके साथ साझा किया। इस मौके पर बच्चों ने एक सुर में अपनी मातृभाषा और देश की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को बचाने और उनके प्रचार-प्रसार में अपना योगदान देने का संकल्प लिया। स्कूल के शिक्षकों ने भी बच्चों को समझाया कि भाषा सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, ज्ञान और समाज को आपस में जोड़ने वाली सबसे मजबूत कड़ी है।

प्रिंसिपल बोले: बच्चों का कॉन्फिडेंस और बातचीत की कला सुधारने में ऐसे कैंप जरूरी
इस सफल आयोजन को लेकर विद्यालय के प्रिंसिपल (Principal) श्री बलबीर ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से स्कूली बच्चों के भीतर एक नया आत्मविश्वास पैदा होता है। इससे बच्चों की अपनी बात को खुलकर रखने की क्षमता और संवाद कौशल (Communication Skills) काफी मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति और समृद्ध भाषाई विरासत से जोड़े रखना बेहद जरूरी है और यह कैंप इस दिशा में एक बेहतरीन कदम साबित हुआ है।

