हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद प्रशासन और राज्य सरकार हरकत में आ गई है। ऐसी दर्दनाक घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इंदौर समेत पूरे प्रदेश में जल स्त्रोतों की सुरक्षा और शुद्धता को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब जिले के हर बोरिंग, कुएं, तालाब और भूजल स्त्रोत का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा।
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जियो-टैगिंग से होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग
दूषित जल सप्लाई की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था का सहारा लिया जा रहा है। जितने भी प्रदूषित जल स्त्रोत हैं उनकी जियो-टैगिंग की जाएगी ताकि उनकी ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
नदियों, तालाबों और भूजल स्त्रोतों को अतिक्रमण, कचरा डंपिंग और औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाई जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, और नगर निगम की संयुक्त एजेंसियां मिलकर सभी जल स्त्रोतों की गुणवत्ता की नियमित जांच करेंगी।
प्रदेशभर में लागू होगी व्यवस्था
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद उठे जनआक्रोश को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि पानी की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जल स्त्रोतो के रखरखाव और नियमित सैंपलिंग के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं जिससे भविष्य में इस तरह का हादसा दोबारा न हो।
क्या है भागीरथपुरा केस?
दिसंबर 2025 में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने की वजह से करीब 36 लोगों की मौत गई थी। लापरवाही का आलम तो यह था कि दूषित पानी की वजह से क्षेत्र के रहवासी करीब 10 दिन पहले से बीमार होना शुरु हो गए थे, लेकिन शासन-प्रशासन ने इस और ध्यान नहीं दिया। शहर में लगातार हो रही मौत के बाद देशभर में बवाल मचा जिसके बाद कार्रवाई हुई और 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
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सात माह बाद भी नहीं हुई जिम्मेदारी तय
इस घटना के बाद जोरशोर से दावे किए गये थे कि जिम्मेदारों को नहीं बख्शा जाएगा। 7 महिने बीत जाने के बावजूद भागीरथपुरा कांड किस अधिकारी की लापरवाही से हुआ यह तय नहीं किया जा सका है। जिन अधिकारियों को हटाया गया था वे आज उच्च पदों पर पदस्थ हैं। हादसे को लेकर आधा दर्जन जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में लंबित हैं जिनकी सुनवाई के दौरान भी जिम्मेदारी तय करने की बात उठ चुकी है।
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