हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर में सार्वजनिक गार्डन के इस्तेमाल को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की व्यवस्था और नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेमीनगर स्थित निगम के सार्वजनिक गार्डन में जैन समाज के एक धर्मगुरु के निधन के बाद अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम के उद्यान विभाग ने आपत्ति जताई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी सार्वजनिक गार्डन में बिना नगर निगम की अनुमति अंतिम संस्कार किया जा सकता है? निगम का कहना है कि पार्क उद्यान विभाग के अधीन है और वहां इस तरह की गतिविधि के लिए निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति जरूरी है।

सुबह-सुबह गार्डन में ही किया अंतिम संस्कार

मिली जानकारी के मुताबिक, जैन समाज के धर्मगुरु नेमीनगर स्थित नगर निगम के गार्डन में ठहरे हुए थे। इसी दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे गार्डन परिसर में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। नगर निगम उद्यान विभाग के कर्मचारियों को इसकी जानकारी करीब सुबह 7 बजे मिली। जब निगम की टीम मौके पर पहुंची, तब तक अंतिम संस्कार पूरा हो चुका था। मौके पर केवल राख और अन्य अवशेष मौजूद थे।

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निगम को नहीं दी गई अनुमति की जानकारी

नगर निगम उद्यान विभाग का कहना है कि अंतिम संस्कार से पहले विभाग को इसकी कोई सूचना या वैध अनुमति नहीं दी गई थी। जानकारी मिलने के बाद उद्यान विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और पंचनामा तैयार किया। पूरे मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। अब आगे की कार्रवाई को लेकर अधिकारियों के स्तर पर फैसला लिया जाना है।

जैन समाज ने पुलिस को दी थी सूचना

वहीं इस मामले में जैन समाज की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। समाज का कहना है कि अंतिम संस्कार से पहले पुलिस को इसकी जानकारी दी गई थी और पुलिस को सूचना देने के बाद ही अंतिम संस्कार किया गया। ऐसे में अब विवाद का केंद्र यही है कि पुलिस को सूचना देना पर्याप्त था या नगर निगम के उद्यान विभाग से भी औपचारिक अनुमति लेना जरूरी था।

निगम ने उठाए नियमों पर सवाल

सहायक उद्यान अधिकारी राहुल वर्मा के मुताबिक, नेमीनगर का यह गार्डन नगर निगम के उद्यान विभाग के अधीन आता है। सार्वजनिक पार्क में किसी भी तरह की गतिविधि के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।
अधिकारी के मुताबिक, मौके पर पंचनामा तैयार कर लिया गया है और मामले की पूरी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।

सार्वजनिक पार्क में अंतिम संस्कार पर बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल और उनके प्रबंधन से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। अगर किसी सार्वजनिक गार्डन में इस तरह की अनुमति दी जा सकती है तो उसकी प्रक्रिया क्या है? और अगर अनुमति जरूरी है तो क्या इस मामले में वह प्रक्रिया पूरी की गई थी?फिलहाल नगर निगम की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर है।

वहीं जैन समाज की ओर से पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आने के बाद अब यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित विभागों के बीच अनुमति और सूचना को लेकर आखिर स्थिति क्या थी। नेमीनगर का यह मामला अब सिर्फ अंतिम संस्कार को लेकर विवाद नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक पार्कों के इस्तेमाल के नियम और प्रशासनिक अनुमति की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

जैन समाज ने कही ये बात

इधर, जैन समाज ने बताया कि नेमीनगर जिनालय में 11 अगस्त को प्राकृताचार्य आचार्य सुनील सागर जी महाराज के संघस्थ क्षुल्लक सुलब्धि सागर जी की समाधि हो गई, जिनकी अग्नि क्रिया 12 अगस्त को प्रातः नेमीनगर स्थित विद्यासागर उद्यान में की गई। उद्यान में अंतिम क्रिया पर कहा कि हमारे यहां की यह परंपरा रही है, पहले भी दो समाधियां यहां हुईं, उनका अंतिम संस्कार, उनकी अग्नि क्रिया इसी उद्यान में पहले भी हो चुकी है। यह यहां की परंपरा है और दिगंबर समाज की परंपरा है कि किसी भी साधु का, ऐलक का, क्षुल्लक का या साध्वी का अंतिम संस्कार श्मशान में नहीं करते। या तो हमारी नसिया में करते हैं, अन्यथा जहां परंपरा है, ऐसे अंतिम संस्कार अग्नि क्रिया करने का, वहां किया जा सकता है। इसी परंपरा के तहत आज यह अंतिम संस्कार विद्यासागर उद्यान में संपन्न हुआ। अतः इसमें किसी भी प्रकार की विवाद करने की कोई आवश्यकता नहीं है, यह परंपरा है।

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