हेमंत शर्मा, इंदौर। भाजपा नेता और एमआईसी सदस्य रहे जीतू यादव को पार्षद कमलेश कालरा विवाद मामले में बड़ी राहत मिली है। पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद जीतू यादव का नाम पूरक चालान से हटा दिया गया है। पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं।
क्या था पूरा मामला?
4 जनवरी 2025 को भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर विवाद और हंगामे की घटना सामने आई थी। इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर काफी तूल पकड़ा था। घटना के बाद जीतू यादव को संदेही मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी। वहीं भाजपा संगठन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों से जवाब मांगा था।
जांच में क्या सामने आया?
पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान के अनुसार जांच के दौरान ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, जिनसे यह साबित हो सके कि जीतू यादव घटनास्थल पर मौजूद थे या उन्होंने सीधे तौर पर किसी प्रकार की धमकी या अभद्रता की थी। जांच में पार्षद कमलेश कालरा की पत्नी अर्चना कालरा, बेटे दीपेश और अन्य परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार इन बयानों में भी जीतू यादव की घटनास्थल पर मौजूदगी का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने CDR और मोबाइल लोकेशन निकाली जिसमें यह साबित हुआ कि जीतू यादव मौके पर मौजूद नहीं थे। जीतू यादव के द्वारा बताई गई लोकेशन के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिले थे। जिसे कोर्ट में पेश किया गया है। जिससे साबित होता है कि जीतू यादव घटना के वक्त मौके पर मौजूद नहीं थे। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की। घटना वाले दिन जीतू यादव की लोकेशन अवंतिका गैस एजेंसी के पास स्थित सामुदायिक भवन क्षेत्र में पाई गई, जो घटनास्थल से अलग बताई गई। तकनीकी साक्ष्यों और अन्य गवाहों के बयानों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की।
अन्य आरोपियों के खिलाफ चालान बरकरार
पुलिस ने अपनी जांच पूरी करने के बाद अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान कोर्ट में पेश कर दिया है। हालांकि जीतू यादव के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण उनका नाम चालान से हटा दिया गया।
राजनीतिक गलियारों में फिर चर्चा
कमलेश कालरा और जीतू यादव के बीच का विवाद उस समय भाजपा संगठन और प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच गया था। दोनों पक्ष मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और पार्टी संगठन के समक्ष अपनी-अपनी बात रख चुके थे। इस विवाद को लेकर भाजपा ने दोनों नेताओं से स्पष्टीकरण भी मांगा था। अब पुलिस की जांच में जीतू यादव को राहत मिलने के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। वहीं कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया न्यायालय में जारी रहेगी।

