Business Desk – INR vs USD Details 18 June : भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार, 18 जून को रुपया दबाव में रहा. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 13 पैसे कमजोर होकर 94.66 पर खुला. इस कदम ने बाजार में इस बात की आशंका और मजबूत कर दी है कि आने वाले समय में अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजार पर सीधा असर देखने को मिल रहा है.

फेडरल रिजर्व का सख्त संकेत और बाजार पर असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हालिया पॉलिसी मीटिंग में नीति निर्माताओं ने बाजार की अपेक्षा से अधिक सख्त रुख अपनाया. 18 में से 9 पॉलिसी मेकर्स ने 2026 में कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ाने की संभावना जताई है, जो पहले के अनुमानों से कहीं अधिक है. यह रुख इस बात का संकेत देता है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेड आगे भी सख्त नीति अपना सकता है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने भी फेड के इस रुख पर चिंता जताई है. इसके मुताबिक 2027 में कोर PCE महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 2.5% कर दिया गया है, जो पहले के अनुमानों से अधिक है. इससे यह संकेत मिलता है कि महंगाई का दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है.
रुपया पहले ही बदलाव को समझने लगा था
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपया पहले से ही वैश्विक घटनाओं को रिएक्ट करना शुरू कर चुका था. हाल ही में जियोपॉलिटिकल तनावों में कमी और अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदों के चलते रुपया कुछ समय के लिए मजबूत हुआ था. इससे पहले शुक्रवार को रुपया 77 पैसे मजबूत होकर 95.08 पर बंद हुआ था, जो हाल के हफ्तों में इसकी सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त मानी जा रही है.
वैश्विक घटनाओं पर निवेशकों की नजर
निवेशक फिलहाल फ्रांस में हो रहे G7 समिट के नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं. इसमें होर्मुज स्ट्रेट को लेकर संभावित समझौतों और ईरान से जुड़े शांति ढांचे पर चर्चा होने की उम्मीद है. यदि इन मोर्चों पर सकारात्मक प्रगति होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिसका फायदा भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था को मिल सकता है.
इसके साथ ही बाजार प्रतिभागी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत टिप्पणियों का भी इंतजार कर रहे हैं. हालांकि उम्मीद है कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन आगे की नीति दिशा बाजार के लिए बेहद अहम साबित होगी.
विदेशी निवेश और डेट मार्केट से रुपये को सपोर्ट
भारतीय मुद्रा को विदेशी निवेश से भी कुछ समर्थन मिल रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने जून के पहले पांच महीनों में फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के माध्यम से 13,200 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है. इससे इस वर्ष अब तक कुल डेट इनफ्लो लगभग 28,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
इन इनफ्लो को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया कदमों से भी समर्थन मिला है. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक जोखिम कम होते हैं और भू-राजनीतिक तनावों में नरमी आती है, तो विदेशी निवेश और बढ़ सकता है, जिससे आने वाले समय में रुपये को स्थिरता मिल सकती है.

