बिहार में अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 20 दिन की अंतरिम जमानत मांगने वाले कथित ड्रग्स तस्कर को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत जमानत देने के नियम बेहद कड़े हैं और इस मामले में कोई ऐसा असाधारण आधार नहीं है, जिसके चलते अंतरिम जमानत दी जा सके।
40 किलो से अधिक गांजा रखने का आरोप
न्यायमूर्ति तेजस करिया की अवकाश पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ वर्ष 2024 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुलिस के अनुसार, आरोपी को 40 किलो से अधिक गांजा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और बरामद मादक पदार्थ की भारी मात्रा को भी महत्वपूर्ण माना।
पुलिस ने किया याचिका का विरोध
दिल्ली पुलिस ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी एक आदतन अपराधी है। पुलिस ने यह भी कहा कि उसकी बहन की शादी से जुड़ी धार्मिक रस्में निभाने के लिए परिवार में अन्य भाई मौजूद हैं। ऐसे में केवल शादी में शामिल होने के आधार पर अंतरिम जमानत देना उचित नहीं होगा।
एनडीपीएस कानून में जमानत के सख्त प्रावधान
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के तहत जमानत से संबंधित पाबंदियां सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में कहीं अधिक कठोर हैं। अदालत ने कहा कि अंतरिम या नियमित जमानत केवल विशेष और असाधारण परिस्थितियों में ही दी जा सकती है।
असाधारण परिस्थिति साबित नहीं कर पाया आरोपी
अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता अपनी बहन की शादी में शामिल होने की इच्छा के अलावा कोई ठोस और असाधारण कारण प्रस्तुत नहीं कर सका। ऐसे में उसे अंतरिम जमानत देने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। इसी वजह से हाई कोर्ट ने उसकी 20 दिन की अंतरिम जमानत की याचिका खारिज कर दी।
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