पटना।IRCTC होटल टेंडर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला टाल दिया है। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर कोर्ट अब 16 जुलाई को अपना निर्णय सुनाएगा। इससे पहले 6 मई को हुई सुनवाई में भी कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।
​अदालत की यह कार्यवाही उस दौर से जुड़ी है जब लालू यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे। यह मामला मुख्य रूप से रांची और पुरी में स्थित दो होटलों के टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर इन होटलों और संबंधित जमीनों को निजी कंपनियों को पट्टे पर दिया गया, जिससे कुछ चुनिंदा लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।

​कोर्ट की टिप्पणियां और कानूनी लड़ाई

राउज एवेन्यू कोर्ट ने पिछले साल 13 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा था कि टेंडर घोटाले की पूरी साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई थी। अदालत का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया में लालू का सीधा हस्तक्षेप था, जिससे उनके परिवार को अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। इसी आधार पर कोर्ट ने लालू परिवार के खिलाफ मुकदमा चलाने का निर्णय लिया था।
​इस आदेश को चुनौती देते हुए लालू परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। वहीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके पास इस मामले से जुड़े पर्याप्त और पुख्ता सबूत हैं, जो आरोपों को पूरी तरह से साबित करते हैं।

​आरोपियों की सूची और लालू परिवार का पक्ष

इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल 16 नामजद आरोपी हैं, जिनमें लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, सरला गुप्ता, विनय कोच्छर, विजय कोच्छर और मेसर्स सुजाता होटल्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।
​दूसरी ओर, लालू परिवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक द्वेष और साजिश से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य उन्हें और उनके परिवार को परेशान करना है। अदालत में अपनी बेगुनाही का दावा करते हुए उन्होंने इसे झूठा बताया है। फिलहाल, अब सभी की नजरें 16 जुलाई को आने वाले कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस केस की अगली दिशा तय करेगा।