वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। हाईकोर्ट की डीबी ने बिलासपुर जिले के गांवों से गुजर रही हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों से खेतों में विद्युत प्रभाव और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की कमेटी की रिपोर्ट लगातार लंबित रहने पर केंद्र सरकार पर 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अब रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा। जनहित याचिका की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। इसी दिन कमेटी की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर उपलब्ध रहना अनिवार्य किया गया है।

करीब 10 गांवों में हाईटेंशन लाइन से परेशानी का दावा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिलासपुर-रतनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास के करीब 8 से 10 गांवों में खेतों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइनों से ग्रामीणों को हो रही परेशानियों का उल्लेख था। रिपोर्ट के अनुसार, इन गांवों में बड़ी संख्या में बिजली के टावर लगे हैं और इनके बीच से 400 से 800 केवी तक की बिजली लाइन गुजरती है। ग्रामीणों ने आसपास के क्षेत्र में विद्युत प्रभाव महसूस होने और खेतों में काम करने में परेशानी की शिकायत की थी। खबर में यह भी बताया गया था कि कुछ ग्रामीण सुरक्षा के लिए गमबूट पहनकर खेतों में जाने को मजबूर हैं और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि प्रभावित होने का दावा किया गया।
हाईकोर्ट ने 2024 में दिए थे निरीक्षण के निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले में 15 जुलाई 2024 को केंद्र सरकार के मुख्य विद्युत निरीक्षक, संबंधित प्राधिकरण को प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि संबंधित कंपनियां यह सुनिश्चित करें कि ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे स्थित कृषि भूमि के मालिकों को किसी प्रकार की असुविधा या कठिनाई न हो। तकनीकी रूप से यह जांच करने को कहा गया था कि बिजली की लाइनों से किसी प्रकार का पिलफरेज या इंडक्शन प्रभाव तो नहीं हो रहा है। यदि कोई समस्या मिलती है, तो उसके समाधान के लिए आवश्यक उपाय बताने कहा था।
इन गांवों से गुजर रही हैं हाईटेंशन लाइनें
मामले में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और जबलपुर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड को पक्षकार बनाया गया। कोर्ट के समक्ष केंद्रीय प्राधिकरण की रिपोर्ट में बताया गया कि बिलासपुर जिले के अमटारा, कछार, लोफंदी, मोहतराई, लछनपुर, नवागांव, मदनपुर और भरारी गांवों से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही हैं।
15 जुलाई 2024 को प्रस्तुत दस्तावेजों में यह भी सामने आया था कि कुछ ट्रांसमिशन लाइनों का निर्धारित अवधि के अनुसार मुख्य विद्युत निरीक्षक अथवा विद्युत निरीक्षक से आवधिक निरीक्षण नहीं कराया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मौके का तकनीकी निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
2024 में पेश हुई थी कमेटी की रिपोर्ट
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने निरीक्षण के बाद 9 सितंबर 2024 को कमेटी की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। हालांकि, बिजली कंपनियों ने रिपोर्ट तैयार करने में इस्तेमाल किए गए तकनीकी मानकों और दस्तावेजों की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित तकनीकी पैरामीटर और दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने के निर्देश दिए।
25 अक्टूबर 2024 को कमेटी गठित कर उपचारात्मक उपायों पर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद केंद्र सरकार को कई बार समय दिया गया, लेकिन रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं हो सकी।
20 अगस्त 2024 को तीन सप्ताह, 26 नवंबर 2024 को आगे समय, 23 जनवरी 2025 को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश, 4 मार्च 2025 को दो सप्ताह और फिर 20 मार्च 2025 को चार सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया था। बावजूद इसके, 1 सितंबर 2026 की सुनवाई तक रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं आई।
रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अब कोई और समय नहीं दिया जाएगा: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को पहले भी कई अवसर दिए जा चुके हैं और बार-बार समय दिए जाने के बावजूद कमेटी की रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई। अंतिम अवसर देते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले अनिवार्य रूप से दाखिल की जाए। यह रिपोर्ट विशेष रूप से 25 अक्टूबर 2024 को गठित कमेटी द्वारा सुझाए गए उपचारात्मक उपायों से संबंधित होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि अब रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी।
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