विजय कुमार, जमुई। आजादी के 80 साल बाद भी जिले के खैरा प्रखंड की हरनी पंचायत के जतहर और कैरवातरी गांव के लोगों की जिंदगी एक अदद पुल के अभाव में बदहाल जीवन बिताने को मजूबर हैं। करीब 150 मीटर चौड़ी नदी बरसात के दिनों में इन गांवों को मुख्यधारा से अलग कर देती है। वर्षों से विधायक, सांसद और मंत्री से पुल निर्माण की मांग करते आ रहे ग्रामीणों का अब जनप्रतिनिधियों के आश्वासन से भरोसा लगभग उठ चुका है। लिहाजा ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर बांस-बल्ले के सहारे नदी पर पुल बनाने का काम शुरू कर दिया है।
जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं बच्चे
करीब 250 से 300 की आबादी वाले इन गांवों में सबसे अधिक परेशानी अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को उठानी पड़ती है। स्कूल जाने वाले बच्चों को प्रतिदिन नदी पार कर अरुणमबांक (सोखो) जाना पड़ता है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बच्चों और ग्रामीणों की जान पर हर समय खतरा बना रहता है। सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब कोई ग्रामीण बीमार पड़ता है या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है।

पुल नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को खटोली पर लादकर नदी पार करानी पड़ती है और उसके बाद खैरा रेफरल अस्पताल ले जाया जाता है। पंचायत सरकार भवन, स्वास्थ्य केंद्र समेत अन्य सरकारी सुविधाओं तक पहुंचने के लिए भी ग्रामीणों को इसी नदी को पार करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधि गांव पहुंचकर पुल निर्माण का आश्वासन देते रहे हैं। स्थानीय विधायक की ओर से कई बार पुल निर्माण की डीपीआर तैयार होने और जल्द काम शुरू होने की बात कही गई, लेकिन अब तक निर्माण धरातल पर नहीं उतर सका।
बांस-बल्ली के सहारे ग्रामीण बना रहे हैं बंबू पुल
ऐसे में बरसात शुरू होते ही गांव के लोगों के सामने एक बार फिर से समस्या गंभीर हो गई है। नदी के उफान और लगातार बढ़ती परेशानी के बीच ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया और बांस-बल्ले के सहारे अस्थायी पुल बनाने का काम शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब वर्षों से सरकारी स्तर पर पुल नहीं बन सका तो मजबूरी में उन्हें खुद रास्ता तैयार करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की यह तस्वीर विकास के दावों पर भी सवाल खड़े कर रही है। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और सरकार पर है। उनका कहना है कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जिला प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंचे और स्थायी पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल हो।
डीएम ने ग्रामीणों को मिलने बुलाया
वहीं, मामले की गंभीरता सामने आने के बाद जिलाधिकारी नवीन ने गांव के ग्रामीणों को बुलाया है। ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्या को समझने और इसका स्थायी समाधान निकालने की दिशा में योजना बनाने की बात कही गई है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों पुरानी पुल की मांग इस बार सिर्फ आश्वासन तक सीमित नहीं रहेगी और प्रशासन ठोस कदम उठाएगा।
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