पटना। शहर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आरोपों पर तीखा हमला बोला है। जदयू के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार सहित अन्य नेताओं ने स्पष्ट किया कि पुलिस एनकाउंटर को जाति से जोड़ना न केवल भ्रामक है, बल्कि यह तेजस्वी की गिरती राजनीतिक जमीन को बचाने की एक हताश कोशिश है।
’पॉलिटिकल एनकाउंटर’ का शिकार हुए तेजस्वी
जदयू नेताओं ने कहा कि 2019 से लेकर 2025 तक के विभिन्न चुनावों में बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव को स्पष्ट रूप से नकार दिया है। पार्टी का मानना है कि जिसे जनता ‘पॉलिटिकल एनकाउंटर’ कर चुकी है, वे अब समाज को जाति के आधार पर बांटकर अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं।
अपराध का कोई जाति आधार नहीं
जदयू ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि 20 नवंबर के बाद हुए 22 एनकाउंटरों में मारे गए अपराधी किसी एक समुदाय के नहीं, बल्कि भूमिहार, ब्राह्मण, कुशवाहा, माली और यादव सहित विभिन्न जातियों से थे। जदयू ने तेजस्वी यादव से सवाल किया कि यदि वे केवल एक जाति विशेष की बात कर रहे हैं, तो अन्य मृत अपराधियों की जाति का प्रमाण पत्र वे क्यों नहीं सार्वजनिक करते? पार्टी ने दोटूक कहा कि पुलिस कार्रवाई का आधार अपराधी का अपराध है, न कि उसकी जाति।
आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल
तेजस्वी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए 50 अपराधों के आंकड़ों को जदयू ने ‘काल्पनिक’ करार दिया। जदयू का दावा है कि इनमें से 19 मामलों का तो स्थानीय थानों में कोई रिकॉर्ड ही नहीं है, न ही इनमें घटना का सही समय और स्थान दर्ज है। पार्टी ने इसे जनता को गुमराह करने का प्रयास बताया।
’ट्रिपल सी’ पर जीरो टॉलरेंस
जदयू ने दोहराया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ‘क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म’ (ट्रिपल सी) के खिलाफ सदैव सख्त रही है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को पूरी छूट है और भविष्य में भी अपराधियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जदयू ने तेजस्वी पर आरोप लगाया कि वे दारोगा राय जैसे महान नेताओं की गौरवशाली राजनीतिक विरासत को अपनी ओछी जातीय राजनीति से कमजोर कर रहे हैं। अंत में, जदयू ने चेताया कि समाज को बांटने की कोशिश करने वालों को बिहार की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

