“If you can’t say something nice, don’t say anything at all.” स्मरण रहे बातचीत मात्र शब्दों का आदान-प्रदान नही है यह हृदय और विचारों को जोड़ने वाली एक प्रभावशाली प्रक्रिया भी है। बातचीत की शुरुआत जिस शब्द से होती है उसका असर पूरे संवाद पर रहता है। जब संवाद की शुरुआत ही ‘ना’ या ‘नहीं’ से हो तो सामने वाला यह महसूस करता है कि उसकी बात सुने बिना ही उसे अस्वीकार कर दिया गया है। इसका दुष्परिणाम यह होता है कि बातचीत में सहजता के बजाय रक्षात्मकता और असहजता पैदा होती है। ‘ना’ से बातचीत की शुरुआत संवाद के बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी कर देती है। ‘ना’ से अपनी बात आरंभ करने वालों से सामने वाला अपनी बात खुलकर रखने से यथा सम्भव बचता है क्योंकि उसे यही लगता है कि उसके विचारों या भावनाओं को महत्व नहीं दिया जा रहा है। किसी की दलील, सलाह और विचारों से पूरी तरह असहमत मगर बातचीत की कला में माहिर व्यक्ति सर्वप्रथम सामने वाले की पूरी बात धैर्य से सुनने और समझने का अभिनय करता है फिर अपनी असहमति व्यक्त करते हुए कहता है आप सही कह रहे हैं मगर …….।
इसी विषय से सम्बंधित एक प्रसिद्ध श्लोक सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्। का अर्थ है सत्य बोलें, लेकिन प्रिय और मधुर ढंग से बोलें। “You catch more flies with honey than with vinegar.” इसका आशय है कठोरता की अपेक्षा मधुरता से काम अधिक आसानी से बनता है।कलात्मक संवाद ही प्रभावी और सकारात्मक होता है।“A kind word is like a spring day.” इस Idioms का अर्थ है मधुर और सकारात्मक शब्द वातावरण को सुखद बना देते हैं।
ग़लत प्रस्ताव, अनुचित व्यवहार, स्वयं की सुरक्षा, व्यक्तिगत सीमा या सिद्धांतों के विपरीत परिस्थितियों में स्पष्ट रूप से विरोध, निषेध, ना और नही कहना गलत नहीं है बस इसे वार्तालाप के स्वागत द्वार में सजा कर रखना ग़लत है। तोरण की तरह मुख द्वार पर झूलता हुआ शब्द ‘ना’ स्पष्टवादिता से ज़्यादा भीतर छुपे सूक्ष्म अहंकार, हीनभावना या असुरक्षा एक भावना की झलक देता है। इसलिए संवाद की शुरुआत नकार से न करते हुए सुनने, समझने और सम्मान देने के भाव से क़रें। याद रखें शब्द बहुत छोटे होकर भी किसी घातक हथियार से ज़्यादा घातक हो सकते हैं। तीक्ष्ण तलवार भी जिस सम्बन्ध को काट नही पाती एक कटु शब्द क्षण भर में यह काम कर सकता है। इसके विपरीत एक प्रसिद्ध सुभाषित है प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः। अर्थात् मधुर वाणी से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं। सकारात्मक शब्द रिश्ते बनाकर उसे समाधान की ओर ले जाते हैं।बातचीत में सदा याद रखें मधुर शब्द से समाधान के दरवाज़े खुलते हैं और नकारात्मक शुरुआत से संवाद के द्वार बंद हो जाते हैं।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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