अंग्रेजी की प्रसिद्ध कहावत “Too many cooks spoil the broth” का आशय है—जब किसी एक काम में आवश्यकता से अधिक लोगों का हस्तक्षेप होता है तो बनता काम भी बिगाड़ जाता है. हिंदी लोकभाषा में इस भाव के लिए कहते हैं “जहाँ मिले पाँच माली, वहाँ बाग सदा खाली” कल्पना कीजिए, एक ही तरकारी को बनाने में कई रसोइये एक साथ जुट जाएँ और हर कोई अपने अनुभव और पसंद से नमक, मसाले और सामग्री डालने लगे तो क्या होगा? यही ना कि सब्ज़ी के स्वाद का संतुलन बिगड़ जाएगा. Too Many Cooks, Too Little Success यही बात जीवन, परिवार, कार्यालय और किसी भी टीम वर्क के लिए भी सही है. जब किसी एक प्रोजेक्ट में कई लोग अपनी-अपनी योजना थोपने लगते हैं तो विचारों का टकराव, भ्रम और अनिर्णय की स्थिति पैदा होती है. स्पष्ट नेतृत्व के ना होने से यह समस्या और गंभीर हो जाती है. जब एक ही काम की जिम्मेदारी अनेक लोगों में बँट जाती है तो गलती होने पर जवाबदेही तय करना भी कठिन हो जाता है.
“सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस।
राज धर्म तनु तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥”
यह प्रसिद्ध चौपाई महाकवि तुलसीदास रचित रामचरितमानस से ली गई है, वस्तुतः इसका जो अर्थ है वह विषय से थोड़ा भिन्न अवश्य है मगर इतना तो है कि मंत्री, वैद्य और गुरु जैसे भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में कुशलता रखने वालों का ग़लत निर्णय समाज के लिए कितना अहितकर हो सकता है.
इस लेख का आशय यह नहीं कि टीमवर्क या सहयोग आवश्यक नहीं है. दरअसल सफल टीम वही है जिसमें अनेक विचार हों लेकिन सभी की दिशा एक हो. सहयोग अनेक का हो, लेकिन नेतृत्व स्पष्ट हो. परिवार हो या कार्यालय हर महवपूर्ण काम के लिए स्पष्ट योजना, निश्चित जिम्मेदारी और आवश्यकतानुसार सीमित हस्तक्षेप ही सफलता की कुंजी है. बहुत से हाथ काम को गति दे सकते हैं, लेकिन बहुत अधिक नियंत्रक हाथ काम को दिशाविहीन भी कर सकते हैं.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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