रांची। झारखंड ऊर्जा विकास निगम और झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम से जुड़े करोड़ों रुपये के बैंक फ्रॉड ने वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जांच में सामने आया है कि निगम की 57.16 करोड़ रुपये की तीन एफडी समय से पहले तोड़ दी गईं, जिनमें से 40.50 करोड़ रुपये कथित तौर पर एक फर्जी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। जांच में फर्जी एफडी प्रमाणपत्र, बैंक खातों के सत्यापन में लापरवाही और निर्धारित प्रक्रिया से हटकर निवेश संबंधी फैसलों के तथ्य सामने आए हैं।

मामले में निगम के तीन वित्त अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं पूरे 109 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड की सीआईडी जांच भी चल रही है।

57 करोड़ की एफडी क्यों तोड़ी गई?

विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, निगम की तीन सावधि जमाओं की अवधि पूरी होने में अभी पांच से सात महीने का समय बाकी था। इसके बावजूद इन एफडी को समय से पहले तोड़कर 57 करोड़ 16 लाख 96 हजार 999 रुपये निकाल लिए गए।

समय से पहले एफडी तोड़े जाने से निगम को करीब 4.50 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का भी उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।

इसके बाद करीब 40 करोड़ 50 लाख 500 रुपये एफडी में निवेश के नाम पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिरसा चौक शाखा, हिनू स्थित एक खाते में भेजे गए। जांच में बाद में इस खाते को फर्जी बताया गया।

फर्जी एफडी प्रमाणपत्रों से खुला खेल

जांच के दौरान एफडी के बदले मिले प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40.50 करोड़ रुपये की राशि के बदले प्राप्त एफडी प्रमाणपत्रों का उचित सत्यापन नहीं कराया गया।

जांच में एक अहम गड़बड़ी यह सामने आई कि अलग-अलग एफडी प्रमाणपत्रों पर एक ही खाता संख्या दर्ज थी, जबकि प्रत्येक एफडी का खाता विवरण अलग होना चाहिए था।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 25 करोड़ रुपये के लिए बैंक को पत्र भेजा गया था, लेकिन 15.50 करोड़ रुपये के लिए अलग पत्र नहीं भेजा गया। इसके बावजूद बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पांच अलग-अलग एफडी प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।

इसी क्रम में बैंक ऑफ इंडिया के चेक नंबर 400742 और 400743 भी जांच के दायरे में आए। इन पर क्रमशः 25 करोड़ 500 रुपये और 15 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि दर्ज थी।

सत्यापन प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल

जांच रिपोर्ट में इस बात पर विशेष सवाल उठाया गया है कि इतनी बड़ी रकम जिस बैंक खाते में ट्रांसफर की गई, उसका पहले सत्यापन क्यों नहीं कराया गया।इसके अलावा फर्जी एफडी प्रमाणपत्र प्राप्त होने के बाद भी संबंधित बैंक से उनकी पुष्टि नहीं कराए जाने को लेकर भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।

रिपोर्ट में फर्जी बैंक खाता और एफडी प्रमाणपत्र के अलावा बैंक से ब्याज दर मंगाने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने तथा सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना निर्णय लेने जैसे बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया है।

तीन वित्त अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में

इस मामले में तीन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है—

रंजीत कुमार सिंह, उप महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा)
श्रीकांत, वरीय प्रबंधक (वित्त एवं लेखा)
जयंत प्रसाद, महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा)

ऊर्जा विकास निगम ने वित्त निदेशक मधुप कुमार की अध्यक्षता में आंतरिक जांच कमेटी गठित की थी। तीनों अधिकारियों से अलग-अलग पूछताछ की गई। इसके बाद तैयार रिपोर्ट सीएमडी को भेज दी गई है।

अधिकारियों ने अपने बचाव में क्या कहा?
रंजीत कुमार सिंह

जांच दल ने 40.50 करोड़ रुपये के ट्रांसफर से जुड़े बैंक खाते के सत्यापन में लापरवाही को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि बैंक की ओर से गलत लाभार्थी नाम और खाता संख्या उपलब्ध कराए जाने के कारण धोखाधड़ी हुई। उन्होंने अपनी ओर से किसी प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार किया और बताया कि सीआईडी जांच जारी है तथा राशि की रिकवरी की प्रक्रिया चल रही है।

श्रीकांत

श्रीकांत की भूमिका भी 40.50 करोड़ रुपये की एफडी से जुड़ी प्रक्रिया में जांच के दायरे में आई है।उन्होंने अपने पक्ष में कहा कि बैंक स्तर पर गलत विवरण दिए जाने के कारण धोखाधड़ी हुई और उनकी ओर से कोई प्रत्यक्ष या व्यक्तिगत निर्णय नहीं लिया गया।

जयंत प्रसाद

जयंत प्रसाद पर संबंधित खाते में 40.50 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने, एफडी प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं कराने और वित्तीय नियमों का पालन नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि निगम में निवेश की प्रक्रिया पहले से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार की गई थी और उनकी ओर से कोई अनियमितता नहीं हुई। उनके मुताबिक बैंक स्तर पर गलत विवरण दिए जाने के कारण धोखाधड़ी हुई।

समय से पहले एफडी तोड़ने को लेकर उन्होंने कहा कि वैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए राशि की आवश्यकता थी और पुनर्निवेश पर बेहतर ब्याज मिलने की संभावना को देखते हुए एफडी तोड़ी गई थी।

सीआईडी जांच जारी, विभागीय कार्रवाई भी आगे बढ़ी

109 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड की जांच अब दो स्तरों पर आगे बढ़ रही है। एक ओर सीआईडी पूरे मामले की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन वित्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

जांच में सामने आए फर्जी बैंक खाते, एफडी प्रमाणपत्रों और सत्यापन में हुई चूक से यह मामला निगम की वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।