Rajasthan News: राजस्थान की जोजरी और लूणी नदी को लेकर दिल्ली से लेकर जोधपुर तक हड़कंप मच गया है। फैक्ट्रियों का केमिकल वाला काला पानी सीधे नदी में गिराने के लिए जमीन के अंदर 4 किलोमीटर लंबी सीक्रेट पाइपलाइन बिछाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर इतनी गहरी नाराजगी जताई है कि सीधे सीबीआई (CBI) जांच कराने तक की बात कह दी। कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए राज्य सरकार ने आनन-फानन में मामले की जांच के लिए सीनियर आईपीएस की अगुवाई में एसआईटी (SIT) बना दी है।

आधी रात को छापा और उखड़ी पाइपलाइन
यह पूरा खेल तब सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट की बनाई हाईपावर कमेटी ने 27 मई की रात को जोधपुर के सांगरिया इलाके में बने सीईटीपी (CETP) प्लांट पर अचानक छापा मार दिया। कमेटी को गुप्त सूचना मिली थी कि यहां से खेल हो रहा है। मौके पर जब जांच हुई, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। जमीन के नीचे गुपचुप तरीके से दबाई गई एक लंबी पाइपलाइन मिली, जिससे बिना साफ किए फैक्ट्रियों का तेजाबी पानी सीधे जोजरी नदी में उड़ेला जा रहा था।
मामला इतना गंभीर था कि आधी रात को ही जिला कलेक्टर समेत तमाम बड़े अधिकारी मौके पर दौड़ पड़े। अगले ही दिन गुरुवार को जेसीबी बुलाकर इस अवैध पाइपलाइन को जड़ से उखाड़ फेंका गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- आंख बंद करके बैठे थे अफसर?
जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को जमकर लताड़ लगाई। कोर्ट ने सीधा सवाल किया कि इतनी बड़ी अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछ गई और स्थानीय सरकारी एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी? यह सब किसकी शह पर हो रहा था?
अदालत ने कहा कि सालों से कोर्ट इस मामले को देख रहा है, फिर भी राजस्थान में पर्यावरण की ऐसी दुर्दशा होना बेहद चिंताजनक है। इस काले पानी को पीकर बेजुबान जानवर दम तोड़ रहे हैं।
प्रदूषण बोर्ड पर गिरे गाज, तीन बड़े अधिकारी नपे
सुप्रीम कोर्ट में फजीहत से बचने के लिए राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने सुनवाई से ठीक पहले गुरुवार की रात को ही बड़ी कार्रवाई कर दी। जोधपुर की रीजनल ऑफिसर कामिनी सोनगरा को पद से हटाकर एपीओ (APO) कर दिया गया है। लैब इंचार्ज देवेंद्र सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। क्षेत्रीय कार्यालय के एईएन कुणाल खत्री को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि प्रदूषण विभाग की टीम हर महीने इस प्लांट का दौरा करती थी। पानी के सैंपल भी लिए जाते थे, लेकिन यह सब सिर्फ कागजी खानापूर्ति और औपचारिकता तक ही सीमित था। इसी वजह से अधिकारियों की भूमिका पर सबसे बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार बोली- नहीं चाहिए CBI
कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ सख्त एफआईआर (FIR) दर्ज की जा रही है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा रहा है, इसलिए फिलहाल सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से भारी जुर्माना और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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