Jodhpur Nagar Nigam Election: शुक्रवार को होने वाले जोधपुर नगर निगम चुनाव में मुकाबला सिर्फ पार्षदों की जीत-हार तक सीमित नहीं है। इस चुनाव से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल समेत कई नेताओं की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। 100 वार्ड वाले एकीकृत नगर निगम के लिए हो रहे चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश में हैं। यही वजह है कि मतदान से पहले जोधपुर में बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी रोड शो के जरिए भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर अशोक गहलोत गुरुवार को जोधपुर के एक होटल में चुनावी समीकरणों पर रणनीति बनाते रहे। गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी पूरे निगम क्षेत्र में दौरा किया और घर-घर जाकर भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की। गहलोत ने जोधपुर में कांग्रेस के पक्ष में माहौल होने का दावा करते हुए बोर्ड बनाने की बात कही है। वहीं शेखावत ने जोधपुर में ट्रिपल इंजन की सरकार बनने का दावा किया है।

एकीकृत निगम ने बदला चुनाव का समीकरण

अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते जोधपुर नगर निगम को दो हिस्सों में बांटा गया था। नगर निगम उत्तर में कांग्रेस की मेयर थी, जबकि नगर निगम दक्षिण में भाजपा की मेयर थी। अब दोनों निगमों को मिलाकर एकीकृत नगर निगम बनाया गया है और 100 वार्ड के लिए चुनाव हो रहे हैं।

ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने अपने पुराने प्रभाव को बनाए रखने की चुनौती है। कांग्रेस की ओर से पूर्व मेयर कुंति देवड़ा एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। वहीं भाजपा की पूर्व मेयर वनीता सेठ इस चुनाव से दूर हैं।

जोधपुर का नतीजा अशोक गहलोत के लिए भी खास महत्व रखता है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उनके गृह जिले में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में नगर निगम चुनाव में जीत उनके लिए पार्टी के भीतर अपना प्रभाव बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

शेखावत विधायकों से भी आगे सक्रिय

जोधपुर नगर निगम क्षेत्र में सरदारपुरा, जोधपुर शहर, सूरसागर विधानसभा और लूणी के कुछ हिस्से शामिल हैं। भाजपा की ओर से गजेंद्र सिंह शेखावत पिछले कई दिनों से पूरे निगम क्षेत्र में लगातार दौरे कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा वार्डों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं।

इसके मुकाबले सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी, जोधपुर शहर विधायक अतुल भंसाली, लूणी विधायक जोगाराम पटेल और सरदारपुरा से प्रत्याशी रहे महेंद्र सिंह राठौड़ अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक सक्रिय हैं।

वार्ड नंबर 7 से चुनाव लड़ रहे रविंद्र सिंह मामडोली का चुनाव भी शेखावत के लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है। शेखावत गुरुवार को उनके लिए भी घर-घर वोट मांगते नजर आए।

गहलोत के लिए जोधपुर की जीत क्यों अहम?

अशोक गहलोत कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। लेकिन हाल के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जोधपुर में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बाद नगर निगम चुनाव उनके लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है।

जोधपुर के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश व्यास के मुताबिक, इस बार का निगम चुनाव गहलोत के लिए पहले के निगम चुनावों की तुलना में कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेतृत्व की नजर भी इस बार के परिणाम पर है। ऐसे में यदि कांग्रेस जोधपुर में बोर्ड बनाने में सफल रहती है तो गहलोत के लिए पार्टी में अपना प्रभाव कायम रखने की स्थिति मजबूत हो सकती है।

शेखावत के लिए भी बड़ा राजनीतिक मौका

गजेंद्र सिंह शेखावत तीसरी बार सांसद चुने गए हैं। हर सांसद की तरह उनके सामने भी राज्य की राजनीति में अपना कद बढ़ाने की चुनौती है। जोधपुर नगर निगम चुनाव में उनकी लगातार सक्रियता इसी दिशा में देखी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार प्रवीण धींगरा का कहना है कि शेखावत अंततः राज्य की राजनीति में आना चाहेंगे। ऐसे में जोधपुर नगर निगम चुनाव उनके लिए अपनी राजनीतिक पकड़ दिखाने का बड़ा मौका है।

शहर के साथ जिले के नतीजों पर भी नजर

जोधपुर शहर के नगर निगम चुनाव के साथ जिले की छह नगर पालिकाओं के परिणाम भी महत्वपूर्ण रहेंगे। इन नतीजों का असर केवल शहर के नेताओं पर नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के विधायकों की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।

इस बार जिले में चार नई नगर पालिकाओं के लिए भी चुनाव हुए हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के बड़े नेता इन क्षेत्रों के परिणामों पर भी नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे कई विधायकों के प्रदर्शन का राजनीतिक पैमाना भी बन सकते हैं।

पढ़ें ये खबरें