Jojari River Pollution: राजस्थान की Jojari River में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे महज दिखावा (आईवॉश) करार दिया। कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञ समिति की ताजा रिपोर्ट से साफ है कि नदी में अब भी एसिडिक पानी बह रहा है, जबकि यह जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है।

क्या राज्य अपने नागरिकों को जहर देना चाहता है?

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई राज्य अपने ही नागरिकों को जहर देना चाहता है, तो यह किसी भी सरकार के लिए सबसे शर्मनाक स्थिति होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

SIT की जांच पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIT की रिपोर्ट से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। अदालत के अनुसार, जांच सही दिशा में आगे बढ़ने के बजाय केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेषज्ञ समिति द्वारा मांगी गई कई जानकारियों का समय पर जवाब नहीं दिया गया।

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आया?

पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने अपनी दूसरी रिपोर्ट में बताया कि जोजरी नदी के कई हिस्सों में अब भी तेज दुर्गंध है और पानी अत्यधिक अम्लीय पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि केवल नदी की सफाई पर्याप्त नहीं होगी। जब तक सभी वैध और अवैध अपशिष्ट निकासी बिंदुओं की पहचान कर उन्हें बंद या नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक प्रदूषण पर प्रभावी रोक संभव नहीं है।

मुख्य सचिव को बनाया जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब उसके निर्देशों का 100 प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राजस्थान के मुख्य सचिव की होगी। अदालत ने यह भी कहा कि विशेषज्ञ समिति ने जहरीले कचरे को नीचे बहने से रोकने के लिए बांध से पानी नहीं छोड़ने का सुझाव दिया था, लेकिन इसके बावजूद पानी छोड़ा गया।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अधिकारियों पर कार्रवाई

राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। सीईटीपी से नमूने लेने और निगरानी से जुड़े कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है। हालांकि, अदालत इन कदमों से संतुष्ट नहीं हुई और कहा कि वास्तविक सुधार जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

औद्योगिक इकाइयों पर भी सख्ती

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि नदी किनारे स्थित सभी फैक्ट्रियां फिलहाल बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो उद्योग दोबारा संचालन चाहते हैं, उन्हें विशेषज्ञ समिति को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनका संचालन अदालत के निर्देशों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होगा। इस्पात उद्योगों ने Zero Liquid Discharge (ZLD) लागू करने की समयबद्ध योजना प्रस्तुत की है। वहीं वस्त्र उद्योगों को भी प्रदूषण नियंत्रण के ठोस उपाय अपनाने होंगे।

औद्योगिक पार्क परियोजना पर भी रोक

विशेषज्ञ समिति की आपत्तियों के बाद काकानी में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क परियोजना पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है। समिति का कहना है कि परियोजना नदी के उच्च बाढ़ क्षेत्र में विकसित की जा रही थी और आवश्यक बफर जोन भी नहीं छोड़ा गया था।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद नवंबर 2025 में न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। समिति की पहली रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 1,500 से अधिक औद्योगिक इकाइयां जोजरी, बांडी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ रही हैं। इससे पर्यावरण, कृषि, पशुधन और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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