चंडीगढ़। हाईकोर्ट ने लुधियाना के 22 साल पुराने हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने मृतका वीरपाल कौर को जलाकर मारने के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे उसके दोषी पति तेजा सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि ‘अलग रहने की मांग’ जैसे तुच्छ विवाद पर गर्भवती पत्नी को आग लगाकर मार डालने की कहानी बेहद कमजोर और अविश्वसनीय है।
दरअसल, मामला 11 जुलाई, 2002 का है, जब वीरपाल को जोगा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 99% जलने की हालत में भर्ती कराया गया था। वह उस समय 6-7 माह की गर्भवती थी। इलाज के दौरान अगले दिन सीएमसी लुधियाना में महिला की मौत हो गई थी। पुलिस ने पति तेजा सिंह और उसके भाई बलजीत सिंह उर्फ गोगा पर हत्या का केस दर्ज कर दोनों भाईयों को गिरफ्तार कर लिया था। 2004 में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने तेजा सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
तेजा के भाई बलजीत की 2015 में मौत हो चुकी है, इसलिए उसकी अपील खत्म हो चुकी है। अब जस्टिस एनएस शेखावत और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का मकसद बेहद कमजोर है कि पत्नी अलग रहना चाहती थी, इसी आधार पर हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया, यह तर्कसंगत नहीं लगता। मौत का बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) संदिग्ध है क्योंकि पुलिस अधिकारी ने केस दर्ज किया, मजिस्ट्रेट को क्यों नहीं बुलाया। डॉक्टर की बजाय जांच अधिकारी ने फिटनेस सर्टिफिकेट लिखा। ऐसे में 99% जलने और सांस की गंभीर समस्या में विस्तृत बयान देना अविश्वसनीय है। मृतका की पोस्टमार्टम या मेडिकल रिपोर्ट में चोट के कोई सबूत नहीं है।
- छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए जरूरी खबर: खेल पुरस्कारों और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के लिए आवेदन शुरू, 5 अगस्त तक करें आवेदन
- मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, अब सिर्फ 10% ही लिया जाएगा ब्रोकन चावल
- उनको प्रशासन का ‘क, ख, ग’… अमित शाह पर राहुल गांधी के बयान को लेकर केशव मौर्य का हमला, अज्ञानी बताते हुए दिया बड़ा बयान
- प्राचीन हरसिद्धि माता मंदिर में चोरी, बदमाशों ने मातारानी के सिंगार पर साफ किया हाथ, CCTV में कैद हुई वारदात
- CM विष्णुदेव साय तीन दिवसीय दिल्ली दौरे पर रवाना, राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात, राहुल गांधी के बयान पर साधा निशाना


