गौरव जैन, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में कथित चिकित्सा लापरवाही, अवैध वसूली, निजी अस्पताल और एम्बुलेंस कर्मियों की मिलीभगत का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 22 वर्षीय गर्भवती महिला ज्योति सोनवानी की मौत के मामले में गौरेला पुलिस ने सेमरा स्थित डीडी अस्पताल के संचालक अखिलेश तिवारी और संबंधित एम्बुलेंस कर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। वहीं प्रशासन ने अस्पताल को सील करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4) (धोखाधड़ी एवं छल), धारा 125(2) (लापरवाही से जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालना) तथा धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है।

रेफर मरीज को निजी अस्पताल ले जाने का आरोप
जानकारी के अनुसार, बसंतपुर निवासी कैलाश कुमार सोनवानी की पुत्री ज्योति सोनवानी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल जीपीएम में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु हो चुकी है और महिला की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। बेहतर उपचार के लिए उसे तत्काल सिम्स, बिलासपुर रेफर किया गया।
परिजनों का आरोप है कि बिलासपुर ले जाते समय एम्बुलेंस कर्मियों ने मरीज की हालत को अत्यंत गंभीर बताकर उन्हें भयभीत किया। रास्ते में किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए उन्होंने परिजनों को समझाया कि बिलासपुर पहुंचने में देर हो सकती है। इसी दौरान मरीज को जिला अस्पताल वापस ले जाने की बजाय कथित रूप से योजनाबद्ध तरीके से सेमरा स्थित निजी डीडी अस्पताल पहुंचा दिया गया।
इलाज के नाम पर ₹2 लाख वसूलने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि डीडी अस्पताल के संचालक अखिलेश तिवारी ने मरीज को पूरी तरह स्वस्थ करने का भरोसा देते हुए लगभग ₹2 लाख खर्च आने की बात कही। इसके बाद मृत शिशु को बाहर निकालने की प्रक्रिया की गई और इलाज के नाम पर किश्तों में राशि वसूली गई।
आरोप है कि पहले ₹1 लाख जमा कराया गया और बाद में जब परिजनों ने मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की इच्छा जताई, तब अस्पताल प्रबंधन ने पूरा भुगतान करने के बाद ही मरीज को ले जाने की अनुमति देने की बात कही। परिजनों का दावा है कि महिला को कई दिनों तक अस्पताल में रोके रखा गया और कुल ₹2 लाख वसूले गए, लेकिन उसे अपेक्षित उपचार नहीं मिला।
सिम्स में उपचार के दौरान हुई मौत
जब ज्योति सोनवानी की हालत अत्यधिक गंभीर हो गई, तब उसे बिलासपुर भेजा गया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। सिम्स अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोगों ने गौरेला-पेंड्रा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। बढ़ते जनाक्रोश के बीच अस्पताल प्रबंधन ने कथित रूप से परिजनों को वसूले गए ₹2 लाख वापस कर दिए।

मेडिकल नेग्लिजेंस की जांच, CMHO से मांगी रिपोर्ट
गौरेला थाना प्रभारी शानिप रात्रे ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर अपराध दर्ज कर लिया गया है। मामले में चिकित्सा लापरवाही के पहलुओं की तकनीकी जांच के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
पुलिस के अनुसार, सीएमएचओ की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले में आगे की वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर डीडी अस्पताल को सील किया जा सकता है। साथ ही इस पूरे घटनाक्रम में जिला अस्पताल के कुछ चिकित्सकों की संभावित भूमिका और कथित साठगांठ की भी जांच की जा रही है।
यह मामला सामने आने के बाद जिले में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली और मरीजों के उपचार से जुड़े मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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