कैथल। हरियाणा के कैथल जिले के गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरे में साधु शिव शंकर पुरी की हत्या और महंत दूजपुरी की गिरफ्तारी के बाद सोमवार को ग्रामीणों ने बड़ा फैसला लिया। गांव में पंचायत कर दूजपुरी के प्रवेश पर रोक लगा दी गई और उन्हें गांव निकाला दे दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से बाबा महेश पुरी को डेरे की महंत की गद्दी सौंप दी।

ग्रामीणों ने मिलकर चुना नया महंत

सोमवार को पूरे गांव के ग्रामीण बाबा राजपुरी डेरे के परिसर में जुटे। पंचायत में सर्वसम्मति से बाबा महेश पुरी को महंत की गद्दी देने का फैसला हुआ। परंपरा के अनुसार ग्रामीणों ने पूरे सम्मान के साथ उन्हें गद्दी पर बैठाया। इसके बाद लोगों ने उनके पैर छूकर प्रणाम किया।

महंत की गद्दी सौंपे जाने के दौरान डेरे में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने डेरे की देखरेख के लिए एक कमेटी भी बनाई है। यह कमेटी डेरे की व्यवस्था संभालने के साथ आय और व्यय का ब्योरा भी रखेगी।

कमालपुर डेरे से बाबा लदाना लाए गए महेश पुरी

बाबा महेश पुरी अब तक गांव कमालपुर स्थित बाबा राजपुरी डेरे में रह रहे थे। सोमवार को उन्हें कमालपुर से बाबा लदाना लाया गया। इस दौरान जिलेभर के अलग-अलग डेरे और मंदिरों से साधु समाज के लोग भी बाबा राजपुरी डेरे में पहुंचे।

साधु समाज की मौजूदगी में महेश पुरी को महंत की गद्दी पर बैठाया गया। वहीं ग्रामीण और प्रशासन मिलकर डेरे में पशुओं और फसलों की देखरेख कर रहे हैं।

2004 में डेरे में आया था दूजपुरी

ग्रामीणों के मुताबिक, दूजपुरी वर्ष 2004 में बाबा लदाना डेरे में आया था। वह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से यहां आया था। उस समय ओमपुरी डेरे के महंत थे। दूजपुरी डेरे में रहकर उनका चेला बन गया।

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2012 में ओमपुरी के बाद दूजपुरी को डेरे की गद्दी सौंपी गई थी। इसके बाद से दूजपुरी लगातार डेरे के महंत रहे।

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