राकेश कथूरिया, कैथल। भारत से शुरू हुई बाल विवाह के खिलाफ मुहिम अब वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुकी है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 4 सितंबर 2026 को बाल विवाह उन्मूलन के लिए प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाल विवाह मुक्त विश्व दिवस के रूप में मनाए जाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। यह पहल बाल अधिकार कार्यकर्ता एवं जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जे आर सी) के संस्थापक भुवन ऋभु की उस सोच का परिणाम है, जिसमें उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समर्पित दिवस की मांग उठाई थी। मार्च 2026 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ़ वोमेन (सी एस वी 70) में भी इस मांग को दोहराया था। अब भारत की यह आवाज वैश्विक प्रतिबद्धता बन चुकी है।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के अनुसार, यह आंदोलन 99 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है और 25 करोड़ से अधिक लोगों ने अपने समुदायों एवं देशों में बाल विवाह समाप्त करने की शपथ ली है। इसके सहयोगी संगठन 782 जिलों में सरकारों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, विद्यालयों, पंचायतों, महिलाओं, धार्मिक नेताओं, पुलिस तथा जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। अभियान के प्रभाव को दर्शाने वाले आंकड़ों के अनुसार, 5.5 लाख से अधिक बाल विवाह रोके एवं टाले गए हैं।
भारत में अभियान के तहत 5 लाख से अधिक बाल विवाह रोके गए, 7 लाख से अधिक स्कूल छोड़ चुके बच्चों का पुनः नामांकन कराया गया तथा 25 करोड़ से अधिक लोगों ने बाल विवाह मुक्त भारत का संकल्प लिया है यह उपलब्धियां दर्शाती हैं कि जब सरकार, सामाजिक संगठन और समुदाय एकजुट होकर कार्य करते हैं, तो बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करना संभव है।
हरियाणा में एमडीडी ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र सिंह मान के नेतृत्व में बाल विवाह, बाल श्रम एवं बाल तस्करी के खिलाफ जागरूकता और संरक्षण का कार्य निरंतर किया जा रहा है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर यह प्रयास बच्चों को सुरक्षित बचपन, शिक्षा और सम्मानजनक भविष्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एमडीडी ऑफ इंडिया, कैथल के जिला समन्वयक अशोक कुमार के नेतृत्व में भी जिले में बाल विवाह के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं विद्यालयों, गांवों, समुदायों एवं विभिन्न संस्थानों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
कैथल में अब तक 703 बाल विवाह रोकथाम संबंधी अंडरटेकिंग, बाल विवाह के खिलाफ 5 शिकायतों पर एफआईआर, 2 बाल विवाह रोके गए तथा कुल 74 डीडीआर/एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें 2 बाल श्रम संबंधी एफआईआर शामिल हैं। इसके साथ ही 43,500 बाल विवाह विरोधी संकल्प लिए गए हैं तथा जागरूकता अभियान के माध्यम से 2,27,645 लोगों तक पहुंच बनाई गई है। ये आंकड़े कैथल में बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे प्रयासों की गंभीरता और प्रभाव को दर्शाते हैं।
बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर आघात है। भारत से शुरू हुई यह मुहिम अब पूरी दुनिया को एक संदेश दे रही है—हर बच्चे को सुरक्षित बचपन, शिक्षा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। भारत की पहल से शुरू हुआ यह अभियान अब बाल विवाह मुक्त भारत से बाल विवाह मुक्त विश्व की ओर बढ़ रहा है।
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