लखनऊ। पीएम मोदी की अगुवाई में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने यूपी में कानपुर-कबरई सेक्शन (NH-34) को 4/6 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में विकसित करने को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लागत 7,145.14 करोड़ रुपये होगी। इसी बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी का आभार जताया है।

सीएम योगी ने जताया आभार

सीएम योगी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि पीएम मोदी के यशस्वी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को आज विकास की एक और बड़ी सौगात मिली है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹7,145 करोड़ से अधिक लागत के कानपुर से कबराई तक 117.7 किलोमीटर लंबे 4/6 लेन एक्सेस-नियंत्रित ग्रीनफील्ड राजमार्ग के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है।

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सीएम योगी ने कहा कि भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

एलिवेटेड कॉरिडोर से जुड़ेंगे भूमिगत हिस्से

बता दें इस परियोजना से आवागमन सुगम होगा, निवेश को नई गति मिलेगी और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा। ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को नई शक्ति देने वाले इस दूरदर्शी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार। टेंडर के तहत चारबाग से चौक तक भूमिगत मेट्रो लाइन, सुरंग निर्माण और सात अत्याधुनिक भूमिगत स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा। इनमें चारबाग, गौतम बुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल चौराहा और चौक स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा चौक स्टेशन के आगे लगभग 350 मीटर लंबा रैंप बनाया जाएगा, जो भूमिगत हिस्से को एलिवेटेड कॉरिडोर से जोड़ेगा।

यूपीएमआरसी पहले ही ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के एलिवेटेड सेक्शन के लिए पांच एलिवेटेड स्टेशनों, वायाडक्ट और वसंत कुंज मेट्रो डिपो के निर्माण संबंधी टेंडर जारी कर चुका है।

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12 स्टेशन होंगे शामिल

करीब 5,801 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले लखनऊ मेट्रो फेज-1बी प्रोजेक्ट में कुल 12 स्टेशन होंगे, जिनमें पांच एलिवेटेड और सात भूमिगत स्टेशन शामिल हैं। परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए दोनों हिस्सों का निर्माण एक साथ किया जाएगा। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि भूमिगत सेक्शन के लिए यह बड़ा सिविल टेंडर परियोजना की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि यह हिस्सा घनी आबादी और पुराने बाजारों वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है तथा कॉरिडोर की कुल लंबाई का बड़ा भाग इसी में शामिल है।

उन्होंने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद चारबाग से वसंत कुंज तक तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। इससे पुराने लखनऊ और मेडिकल कॉलेज जैसे घनी आबादी वाले इलाकों की मेट्रो कनेक्टिविटी बेहतर होगी, सड़क यातायात का दबाव कम होगा और शहर में सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।